प्रमाण पत्रों की जांच के नाम पर अभी तक उर्दू शिक्षकों को नहीं मिला वेतन

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दैनिक झारखंड न्‍यूज

रांची । वेतनमद में आवंटन होने के बाद भी राज्‍य के अधिकांश उर्दू शिक्षकों को वेतन नहीं मिला है। इससे उनके समक्ष भूखमरी की स्थिति उत्‍पन्‍न हो गई है। अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने इसपर चिंता जाहिर की है। रमजान पर्व को देखते हुए इसमें आने वाले अड़चनों को दूर कर जल्‍द वेतन भुगतान करने की मांग की है।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष बिजेंद्र चौबे, महासचिव राममूर्ति ठाकुर और मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद ने कहा कि‍ स्थापित नियम के विपरीत डीडीओ घोषित करने और प्रमाण पत्रों की जांच के नाम पर राज्य के उर्दू शिक्षकों को अब तक वेतन भुगतान नही हो पा रहा है। इन शिक्षकों के वेतन मद में निर्गत आवंटन में निदेशक प्राथमिक शिक्षा के स्तर से कई ऐसी शर्तें लगा दी गई है, जिससे ऐसी समस्या उत्तपन्न हुई है।

निदेशक द्वारा आवंटन पत्र में निर्देश दिया गया है कि उर्दू शिक्षकों के वेतन भुगतान के लिए जिला शिक्षा अधीक्षक निकासी और व्ययन पदाधिकारी होंगे। यह भी अंकित किया गया है कि जिन शिक्षकों के शैक्षणिक प्रशैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच पूरी हो गई हो, उनका ही वेतन भुगतान किया जाए।

संघ ने विभाग के इस रुख पर आपत्ति जताई है। कहा है कि वित्त विभाग से परामर्श के बाद 2014 में तत्कालीन शिक्षा सचिव द्वारा महालेखाकार को प्रेषित एक पत्र के माध्यम से प्राथमिक शिक्षकों के लिए प्रखंड स्तरीय एक प्रधानाध्यपक को ही निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी घोषित किया गया है। इसलिए वर्तमान में उर्दू शिक्षकों के लिए जिला शिक्षा अधीक्षकों को डीडीओ घोषित करना नियमविरुद्ध है।

प्रमाण पत्रों की जांच के संबंध में संघ ने विभागीय शिथिलता को दोषी माना है। सभी शिक्षकों द्वारा प्रमाणपत्रों की जांच के लिए आवश्यक राशि जिला कार्यालयों को तीन वर्ष पूर्व ही उपलब्ध करा दिया गया है। फिर भी किसी शिक्षक के प्रमाणपत्र की जांच लंवित है तो इसके लिए विभाग ने अब तक किसी की जिम्मेवारी तय क्यों नही की। शिक्षकों की इसमें कोई भूमिका नहीं है, इसलिए जांच के नाम पर वेतन रोकना उचित नही।

संघ ने विभाग से मांग की है कि उक्त नियम और पवित्र महीना रमजान एवं ईद को देखते हुए तत्काल प्रधानाध्यपक सह निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी के माध्यम से उर्दू शिक्षकों के वेतन भुगतान का मार्ग प्रशस्त करें।

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