शोध का तरीका बदलेगा बिरसा कृषि विवि, रिसर्च काउंसिल की बैठक में 10 नवंबर को होगी चर्चा

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  • रबी फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने पर होगा जोर : डीआर
  • विश्‍वविद्यालय की विकसित किस्‍मों को अनुशंसा के लिए रखा जाएगा

दैनिक झारखंड न्‍यूज

रांची । एक वर्ष से अधिक समय के बाद बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में रिसर्च काउंसिल की बैठक का आयोजन होने जा रहा है। कुलपति डॉ ओंकार नाथ सिंह के मार्गदर्शन में इस बार निदेशालय अनुसंधान द्वारा खरीफ एवं रबी रिसर्च काउंसिल की संयुक्त बैठक हो रही है। इसमें कोविड-19 के मद्देनजर सभी डीन, एसोसिएट डीन, डायरेक्टर, एडिशनल डायरेक्टर, विभागों के अध्यक्ष/विभागाध्यक्ष, क्षेत्रीय अनुसंधान के एसोसिएट डायरेक्टर, कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रधान के अलावा कृषि संकाय के सभी वरीय व कनीय वैज्ञानिक को भाग लेने को कहा गया हैं। बैठक में वैज्ञानिकों द्वारा खरीफ एवं रबी से सबंधित शोध उपलब्धियों एवं भावी शोध रणनीति पर चर्चा होगी।

मुख्य अतिथि कृषि सचिव अबुबक्‍कर सिद्दीख पी, विशिष्ट अतिथि नीलांबर पितांबर विश्‍वविद्यालय के कुलपति डॉ आरएल सिंह, विशेष अतिथि सेंट्रल अपलैंड राइस रिसर्च स्टेशन के प्रधान वैज्ञानिक (शस्य) डॉ शिव मंगल प्रसाद और हार्प के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ एस कुमार होंगे। बैठक की अध्यक्षता कुलपति डॉ ओंकार नाथ सिंह करेंगे।

डायरेक्टर रिसर्च डॉ अब्दुल वदूद ने बताया कि बैठक में रबी फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने के उपायों पर जोर होगा। किसानों को शुद्ध बीज, अनुशंसित बीज दर, बीज बुआई से पहले फफूंदनाशी से बीज उपचार, मृदा स्वास्थ्य कार्ड की अनुशंसा के अनुसार संतुलित एवं अनुशंसित खाद एवं उर्वरक के उपयोग के प्रति जागरूक करने पर चर्चा होगी। 3-4 वर्षो से वांक्षित शोध उपलब्धि नहीं दिखने वाली कार्यक्रमों की जगह स्थानीय विशेष एवं मांग के अनुरूप नये शोध कार्यक्रमों को शुरू करने की दिशा में पहल होगी।

डॉ वदूद ने बताया कि निदेशालय ने किसान और राज्य हित में वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किये गये विभिन्न फसलों के उन्नत किस्मों को चिन्हित किया गया है। इनमें मड़ुआ (रागी) की बिरसा मड़ुआ -3 (बीबीएम-10), सोयाबीन की बिरसा सोयाबीन–3 (बीएयूएस-40), तीसी (अलसी) की दिव्या (बीएयू -06-03), प्रियम (बीएयू -2012-1) व बिरसा तीसी -1, अरहर की बिरसा अरहर -2 (बीएयू पीपी -09-22), मक्का की बीवीएम -1 (बेबी कॉर्न -1) उरद की बिरसा उरद -2 (आरयूबी – 12-02) एवं सरसों की बिरसा भाभा मस्टर्ड -1 (बीबीएम -1) के अलावा 11 उन्नत लघु कृषि उपकरण प्रमुख है।

क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, चियांकी, पलामू केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित बैंगन की दो किस्में बिरसा ब्रिंजल-1 एवं बिरसा ब्रिंजल-2 को भी चिन्हित किया गया है। इन सभी विकसित एवं चिन्हित किस्मों को रिसर्च काउंसिल की बैठक में अनुशंसा के लिए रखी जाएगी। वर्षो से स्टेट वेरायटल रिलीज कमेटी के अनुमोदन के आभाव में इन किस्मों का लाभ से झारखंड के किसान वंचित है। रिसर्च काउंसिल की अनुशंसा के आधार पर निदेशालय द्वारा प्रस्ताव स्टेट वेरायटल रिलीज कमेटी के अनुमोदन के लिए भेजी जाएगी।

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