मानसून के हालात को देखते हुए बिरसा कृषि विश्‍वविद्यालय ने गठित की तकनीकी समिति

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दैनिक झारखंड न्‍यूज

रांची । राज्य के मौसम में असामान्य बदलाव और विशेषकर मानसून में देरी एवं उसकी अनियमिता को देखते हुए कुलपति डॉ आरएस कुरील ने किसानों को वैकल्पिक कृषि  योजना पर परामर्श सेवा उपलब्ध कराने की पहल की है। निदेशक अनुसंधान डॉ डीएन सिंह की अध्यक्षता में तकनीकी समिति गठित की है। डॉ एमएस यादव, डॉ ए वदूद और ई डीके रूसिया समिति के सदस्य होंगे।

पांच प्रमंडलों के लिए वैकल्पिक कृषि योजना तैयार : कुलपति ने जानकारी दी कि पहली बार कृषि पारिस्थिकी के आधार पर राज्य के सभी पांच प्रमंडलों के लिए वैकल्पिक कृषि योजना तैयार की गई है। बीएयू के डॉ ए वदूद की अध्यक्षता में मौसम वैज्ञानिकों ने राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान क्रीडा, हैदराबाद के वैज्ञानिकों के सहयोग से मौसम की संभावित परिस्थितियों के मद्देनजर वैकल्पिक कृषि योजना प्रतिवेदित किया है। इसे पूरे राज्य में प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए समिति को दो दिनों में परामर्श देने को कहा गया है। इस परामर्श के अनुसार विश्वविद्यालय मुख्यालय और राज्य के जिलों में कृषि‍ विज्ञान केंद्र के माध्यम से कम लागत और कम नुकसान में लाभकारी कृषि को किसानों के बीच बढ़ावा दिया जायेगा।

बिरसा कृषि डायरी से तकनीकों का प्रसार : चालु खरीफ मौसम में बेहतर कृषि तकनीकों को अपनाकर किसानों की आय में बढ़ोतरी के लिए कुलपति ने सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) को किसानों के बीच बिरसा किसान डायरी को बांटने और उल्लेखित कृषि तकनीकों को बताने का निर्देश दिया है। गुरूवार को केवीके, चतरा द्वारा किसान गोष्ठी के माध्यम से पहल की गई। मौके पर जिले के 200 महिला और पुरूष प्रगतिशील किसानों को केवीके वैज्ञानिकों ने डायरी के कृषि तकनीकी महत्त्व और लाभकारी तकनीकों पर प्रकाश डाला। किसानों को डायरी में दी गयी तकनीकों को अन्य किसानों को बताने का आग्रह किया गया। मौके पर जिला कृषि पदाधिकारी, आत्मा परियोजना निदेशक, केवीके प्रमुख और वैज्ञानिक भी मौजूद थे। कुलपति ने बताया कि राज्य के सभी जिलों में केवीके द्वारा यह कार्यक्रम चलाया जायेगा। इससे चालू खरीफ मौसम में बेहतर खेती और अधिक लाभ लेने में किसानों को मदद मिलेगी।

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