धान और मकई की कम अवधि वाली किस्मों की सीधी बोआई करें

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  • कृषि वैज्ञानिकों की सलाह

दैनिक झारखंड न्‍यूज

रांची । पूरे राज्य में मानसून की मौजूदा स्थिति से किसान काफी चिंतित हैं। मौसम की बेरूखी से किसानों को चालू खरीफ मौसम में काफी नुकसान हुआ है। इसकी भरपाई को ध्यान में रखकर बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों ने सफल खेती के लिए कई उपयोगी परामर्श दिये है।

सस्य वैज्ञानिक डॉ एमएस यादव ने धान का बिचड़ा उपलब्ध या तैयार नहीं होने की स्थिति में धान की सीधी बोआई करने को कहा। इसमें कम अवधि में तैयार होने वाली किस्मों में बिरसा विकास धान–110, बिरसा विकास धान–111, वंदना, ललाट, नवीन, सहभागी, आईआर–64 (डीआरटी-1) में से किसी एक किस्म का चुनाव कर बोआई करने की सलाह दी। डॉ यादव ने कहा कि एक एकड़ में सीधी बोआई के लिए 40 किलो बीज की आवश्यकता होती है। खेतों में खर-पतवार नियंत्रण के लिए बोआई के 2 से 3 दिनों के बाद खर-पतवार नाशी दवा प्रेटिलाक्लोर का छिड़काव चार मिली लीटर प्रति लीटर पानी की दर से करना चाहिए।

कृषि वैज्ञानिक परामर्शी दल के परामर्शी डॉ ए वदूद ने किसानों को सलाह दी कि मध्यम जमीन (दोन–3) को जोतकर मिट्टी को खुला छोड़ दें। मेढ़ को दुरूस्त करें। इससे खेतों में जल जमाव हो सकेगा। खर-पतवार भी भली–भांति सड़ जाएंगे। धान की रोपाई के लिए कतार से कतार की दूरी 20 सेंटीमीटर और पौध से पौध की दूरी 10 सेंटीमीटर रखने और चार बिचड़ा प्रति स्थान रोपाई करने का परामर्श दिया है।

डॉ वदूद ने कहा कि धान का बिचड़ा 30 दिनों का हो गया हो। खेतों में कादो करने लायक पानी जमा नहीं हो पाया हो तो आगामी दिनों में होने वाली वर्षा के पानी के साथ–साथ, ऊपरी जमीन से पानी का बहाव रोपा वाले खेतों में कर पानी जमाकर रोपा शुरू करें। एक महीना से पुराना बिचड़े के ऊपर का 10 सेंटीमीटर हिस्सा को काटकर और बिचड़ा के जड़ को 2 ग्राम डीएपी एवं 2 ग्राम एमओपी प्रति लीटर घोल में डालकर रातभर रखकर सुबह धान का रोपा करें।

कृषि वैज्ञानिक परामर्शी दल ने मौसम की स्थिति के आधार पर मकई की खेती में भी कम अवधि वाली (80–90 दिनों में तैयार होने वाली) किस्मों में बिरसा मकई–1, बिरसा विकास–2, प्रिया और विवेक में से किसी किस्म की सीधी बोआई करने की सलाह दी है। उन्होंने मेढ़ बनाकर ही मकई बीज बोने का परामर्श दिया है। एक एकड़ में मकई की बोआई के लिए 8 किलो ग्राम बीज की आवश्यकता होती है। इस फसल में खर-पतवार नियंत्रित रखने के लिए बोआई के 2 से 3 दिनों के बाद खर-पतवार नाशी दवा अट्राजीन का छिड़काव 4 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से करना चाहिए। कीट विभागाध्यक्ष डॉ पीके सिंह ने धान एवं मकई के बीज के बीजोपचार के बाद सीधी बोआई करने का परामर्श दिया है।

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