संघ ने प्रस्तावित शिक्षक प्रोन्नत्ति और स्थानांतरण नियमावली को बताया दोषपूर्ण

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दैनिक झारखंड न्यूज

रांची । अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने प्रस्तावित शिक्षक प्रोन्नत्ति और स्थानांतरण नियमावली को दोषपूर्ण करार दिया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भेजा पत्र है। मांगों को लेकर तीन अगस्त सभी जिलों में संघ के सदस्य धरना देंगे।

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा राज्य के प्राथमिक शिक्षकों के लिए नई प्रोन्नत्ति और स्थानांतरण नियमावली तैयार की जा रही है। संघ के मुताबिक इन नियमावलियों के प्रारूप में अनेक खामियां हैं। यह भविष्य में कई तकनीकी कठिनाईयों और असमानताओं को जन्म देगा।संघ ने इसे लेकर मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को ध्यानाकर्षण पत्र भेजते हुए इनके प्रारूप में सुधार किए जाने की मांग की है।

संघ ने कहा है कि प्रस्तावित प्रोन्नत्ति नियमावली में शिक्षकों के प्रोन्नत्ति का कोई प्रावधान रखा ही नहीं गया है। स्नातक प्रशिक्षित और प्रधानाध्यापक के पदों पर शिक्षकों की प्रोन्नत्ति का मार्ग पूर्णतः बंद करते हुए इन्हें नियुक्ति के माध्यम से भरने की नीति बनाई गई है, जो राज्य सरकार के सेवकों के लिए निर्धारित प्रोन्नत्ति के सिद्धांतों के प्रतिकूल है।

संघ ने कहा है कि सरकार के किसी भी विभाग, कैडर या विभाग में ऐसा प्रावधान नहीं है कि उच्चत्तर पदों को शत प्रतिशत नियुक्ति से भरा जाए। कार्यरत सेवकों को प्रोन्नत होने के सारे दरवाजे बंद कर दिए जाएं। न्यायालय द्वारा बार-बार इन पदों पर कार्यरत शिक्षकों को प्रोन्नत्ति देने का आदेश पारित है।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष ब्रिजेन्द्र चौबे, महासचिव राममूर्ति ठाकुर, मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद ने संयुक्त रूप से कहा है कि प्रोन्नत्ति नियमावली का प्रारूप तैयार करने के लिए तत्कालीन निदेशक की अध्यक्षता में 2018 में गठित कमेटी में बनी। सहमतियों और 2013 में तत्कालीन विभागीय सचिव की अध्यक्षता में गठित अंतर्विभागीय कमेटी की अनुशंसाओं को भी नए प्रारूप में जगह नहीं दी गई है।

शिक्षकों के स्थानांतरण नियमावली में अंतरजिला के लिए 5 वर्षों के सेवा अनुभव की अनिवार्यता को किसी भी सीमा तक शिथिल नहीं किया गया है। इस कारण 2016 में नियुक्त हजारों शिक्षक अपने गृह जिला से सैकड़ों किलोमीटर दूर अन्य जिलों में पदस्थापित है। राज्य सरकार का प्रावधान है कि शिक्षकों का यथासंभव उनके गृह प्रखंडों में पदस्थापन दिया जाए।

संघ विगत वर्षों में इन्ही मांगों को सरकार के समक्ष बार-बार उठाता रहा है। फिर भी, प्रस्तावित नियमावली में इसे नजरअंदाज ही किया गया है। इससे हजारों शिक्षक अपने गृह जिले में पदस्थापन से वंचित रह जाएंगे। संघ के मुताबिक 2016 की नियुक्ति में विभाग ने मौखिक आदेश से जिला विशेष में शिक्षकों का प्रमाण पत्र जमा कर उन्हें अपने गृह जिले में पदस्थापित होने के अवसर से रोका।

संघ ने सरकार से मांग की है कि इस रूप में दोषपूर्ण नियमावली को कैबिनेट से स्वीकृति देने के पूर्व इन बिन्दुओं के समाधान पर विचार अवश्य किया जाए। इन मांगों के साथ-साथ प्रोन्नत्ति के उपरांत आरंभिक वेतन निर्धारण करने सहित अन्य मांगों को लेकर राज्य के सभी जिलों में अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ द्वारा एक दिवसीय धरना दिया जाएगा।

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