जयंती पर पंडित राजकुमार शुक्ल को दी गई साहित्योदय शब्दांजलि

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दैनिक झारखंड न्‍यूज

रांची । मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा बनाने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी पंडित राजकुमार शुक्ल की 145वीं जयंती पर 23 अगस्‍त को अंतर्राष्ट्रीय गोष्ठी सह परिचर्चा का आयोजन किया गया। इसका विश्व में एक साथ 3 चैनलों पर लाइव प्रसारण हुआ। साहित्योदय चैनल पर करीब ढाई घंटे तक चले विशेष लाइव वेबिनार में दुनियाभर के शिक्षाविद, लेखक, अधिकारी, हॉलीवुड, बॉलीवुड के अभिनेता और निर्देशको ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन पद्मश्री डॉ एसएन सुब्बाराव ने किया। कार्यक्रम का विषय ‘भारत की आजादी में पंडित राजकुमार शुक्ल का योगदान’ था।

इस अवसर पर डॉ सुब्बाराव ने कहा कि राजकुमार शुक्ल के बिना महात्मा गांधी का  इतिहास अधूरा है। राजकुमार शुक्ल जैसा हठी व्यक्ति, जिन्होंने गांधी को चंपारण लाने पर मजबूर किया। आप कल्पना कर सकते हैं उस समय का दौर, जहां आवागमन के बहुत सीमित संसाधन थे। वैसी स्थिति में पेशे से किसान राजकुमार शुक्ल कभी कोलकाता, कभी लखनऊ, कभी साबरमती गुजरात गांधी जी से मिलने जाते थे। राजकुमार शुक्ल ने अपनी पूरी जमीन, गाय बछड़ा तक आंदोलन के लिए न्योछावर कर दिया। उस आजादी के दीवाने को भारत रत्न से सुशोभित किया जाना चाहिए, तभी हम उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं।

इस अवसर पर फिल्म अभिनेता राजेश जैस ने कहा कि महात्मा गांधी ने खुद अपनी पुस्तक में लिखा है कि‍ राजकुमार शुक्ल के अंदर हमें सत्य अहिंसा और ईश्‍वर का प्रतिरूप दि‍खता है। उन्होंने कहा की 2011 में जब वह महात्मा गांधी के ऊपर बन रही  फिल्म ‘गांधी द महात्मा’ में काम कर रहे थे, उस दौरान कुछ जानकारी उन्हें मिली। काफी जिज्ञासा हुई थी कि‍ उनके बारे में ढेर सारी जानकारी जुटाई जाए। उन्होंने कहा कि पंडित शुक्‍ल पर अगर फीचर फिल्म बनती है तो वह जन-जन तक उनके संघर्ष और व्यक्तित्व को लोगो के करीब लाने का मौका देगा। युवाओं को उनके बारे में ज्यादा जानकारी होगी।

रांची डीपीएस स्कूल के प्रिंसिपल व सहोदया के अध्यक्ष डॉ राम सिंह ने कहा कि राजकुमार शुक्ल जैसा व्यक्तित्व को शिक्षा विभाग अपने पाठ्यक्रम में शामिल करें, ताकि देश-दुनिया में उनके द्वारा किये गये अंग्रेजो के खिलाफ संघर्ष की सच्ची तस्वीर और इतिहास के बारे में संबंधित सामग्री छात्र और युवाओं तक उपलब्ध हो। उन्होंने कहा की अग्रेज ऐमन ने पंडित शुक्ल के निधन के बाद कहा था ‘शुक्ल अकेला मर्द था जो हमसे बराबर लड़ता रहा’।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पंडित राजकुमार शुक्ल फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि‍ राजकुमार शुक्ल के इतिहास का पुनर्मूल्यांकन बड़े पैमाने पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि‍ शुक्ल जी के संदर्भ में सोशल मीडिया पर या किसी समारोह या किसी व्यक्ति द्वारा दिए गए वक्तव्य में इतिहास से परे और प्रामाणिकता के बिना जो बातें कही जाती है, उन पर इतिहासकार विचार करें। सही साक्ष्य के आधार पर इन बातों को ठीक करें। संस्था राजकुमार शुक्ल फाउंडेशन भारत सरकार से उन्हें भारत रत्न दिलाने के लिए भरपूर प्रयास कर रही है और आगे भी करेगी।

संस्था का यह प्रयास है कि हम भविष्य में पंडित शुक्ल पर एक विशेष फीचर फिल्म बनाए। इसमें परामर्श के लिए बहुत सारे इतिहासकार, साहित्यकार और शोधकर्ता शामिल होंगे। साथ ही, शुक्ल के संदर्भ में प्रामाणिकता के साथ हम जन-जन तक पहुंचे। संस्था का यह भी उद्देश्य है कि शुक्ल के ऊपर जिन लोगों ने विशेष काम किया है, उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाए। संस्था का यह भी प्रयास है कि भविष्य में संस्थान के क्रियाकलाप योगदान और विद्वानों के आलेख के साथ एक स्मारिका का प्रकाशन होगा, जिसे जन-जन तक पहुंचाना हमारा उद्देश्य होगा।

इस अवसर पर दूरदर्शन के कार्यक्रम निर्देशक डॉ अमरनाथ अमर ने कहा कि‍ श्री शुक्ल जाति‍ वर्ग, धर्म इन सबसे ऊपर उठाकर पूरे हिन्‍दुस्तान की जनता के स्वतंत्रता के लिए अलख जगाया। वस्तुतः उनके संबंध में आज के संदर्भ में प्रासंगिकता पर नए सिरे से विचार होना चाहिये।

वरिष्ठ लेखक भैरव लाल दास ने कहा कि‍ राजकुमार शुक्ल के कार्यो को समेटना हम सब की जिम्मेवारी बनती है। कही न कहीं इतिहासकारों ने उनके साथ न्याय नहीं किया और आधी अधूरी जानकारी देकर उनके संघर्ष को दबाने का प्रयास हुआ।

मशहूर लेखिका डॉ सुजाता चौधरी ने कहा कि‍ उस वक्त घवही सहित सैकड़ो टैक्स अग्रेज लगाया करते थे। मुट्ठी भर अग्रेज भारत में आकर हमारे ऊपर शासन किये। हमें आपस में बांटकर वे राज किये। मगर राजकुमार शुक्ल अग्रेजों के खिलाफ खड़ा होकर आंदोलन की नींव रखी।

जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय युवा केंद्र के कार्यक्रम संयोजक भूपेंद्र प्रसाद ने कहा कि‍ महात्मा गांधी भारत की आजादी के लिए चली लड़ाई के सबसे बड़े नायक हैं, यह कहने वाली बात नहीं।

न्यूयॉर्क से शामिल हॉलीवुड के फिल्म निर्देशक कृपा रंजन ने कहा कि‍ इतने बड़े सख्सियत का नाम हमलोग नहीं जान पा रहे है, जो भारत की आजादी के टर्निग पॉइंट रहे हैं। उन्होंने कहा कि‍ हमारा भी प्रयास होगा कि उनके व्‍यक्तित्‍व पर कोई अच्‍छी फिल्म का निर्माण कंरू।

झारखंड विधानसभा के संयुक्त सचिव मिथिलेश कुमार मिश्र ने कहा कि‍ चंपारण किसान आंदोलन आजादी की लड़ाई में मील का पत्थर साबित हुआ था, लेकिन इसकी वजह बने राजकुमार शुक्ल को इतिहास में वाजिब स्थान नहीं मिल सका।

फिल्म निर्देशक ऋषि प्रकाश मिश्रा ने कहा कि‍ चंपारण का किसान आंदोलन अप्रैल 1917 में हुआ था। गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह और अहिंसा के अपने आजमाए हुए अस्र का भारत में पहला प्रयोग चंपारण की धरती पर ही किया। यहीं उन्होंने यह भी तय किया कि वे आगे से केवल एक कपड़े पर ही गुजर-बसर करेंगे।

कार्यक्रम की शुरुआत में पंडित राजकुमार शुक्ल और गांधी की एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म से हुई। कार्यक्रम का संचालन प्रख्यात टीवी पत्रकार, मंच संचालक और सुप्रसिद्ध साहित्यकार पंकज प्रियम ने किया। कार्यक्रम का दुनियाभर के 70 से अधिक देश में सीधा प्रसारण हुआ, जिससे बड़ी संख्या में दर्शक जुड़े रहे। शब्दावली के माध्यम से अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किया। इससे पूर्व हरसाल विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहा है, लेकिन कोरोना संकट को देखते हुए इसबार ऑनलाइन लाइव कार्यक्रम सेमिनार कर उन्हें शब्दांजलि सुमन अर्पित की गई।

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