झारखंड के पूर्व मंत्री की लिखित पुस्‍तक का विमोचन, मचा बवाल

0

दैनिक झारखंड न्‍यूज

रांची । झारखंड के पूर्व खाद्य आपूर्ति मंत्री और वर्तमान में जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय द्वारा लिखित पुस्तक ‘मेनहर्ट नियुक्ति घोटाला, ‘लम्हों की खता’ का विमोचन रांची स्थित उनके आवास पर 27 जुलाई को किया गया। इसके बाद बवाल मच गया। समारोह के मुख्य अतिथि झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव अशोक कुमार सिंह ने कहा कि पुस्तक में मुख्य रूप से परामर्शी के चयन में हुई अनियमितता और भ्रष्टाचार का उजागर किया गया है। इस पुस्तक के माध्यम से झारखंड के निवासियों को मेनहर्ट परामर्शी में हुई घोटाले की वास्तविक जानकारी मिल पायेगी। यह पुस्तक विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका को आईना दिखाने का काम करेगी।

पुस्तक के लेखक सरयू राय ने बताया कि पुस्तक की रचना कोविड-19 के पहले और दूसरे लॉकडाउन की अवधि में उनके द्वारा की गई। आमतौर पर जो पुस्तकें लिखी जाती है, वे पाठकों की रूचि के अनुरूप होती है। इसलिए पुस्तक को 20 खंडों में बांटा गया है। कई लोग परिचित होंगे कि झारखंड अलग राज्य बनने के बाद जब रांची को राजधानी घोषित किया। उस समय से और आज की रांची में बहुत अंतर दिखाई पड़ता है। रांची के कुछ बुद्धिजीवी समाजसेवी की याचिका पर झारखंड उच्च न्यायालय ने 2003 में राज्य सरकार को अन्य राजधानियों की तरह राजधानी रांची में जल-मल निकासी के लिए सिवरेज-ड्रेनेज प्रणाली विकसित करने का आदेश दिया। उसके आलोक में तत्कालीन नगर विकास मंत्री बच्चा सिंह के आदेशानुसार परामर्शी बहाल करने के लिए निविदा निकाल कर दो परामर्शियों का चयन किया। इसके बाद सरकार बदल गई।

श्री राय ने बताया कि 2005 में अर्जुन मुंडा सरकार में नगर विकास मंत्री रघुवर दास बनाये गये। उन्होंने डीपीआर फाईनल करने के लिए 31 अगस्त को एक बैठक बुलाई। उसमें निर्णय लिया गया कि पूर्व से चयनित परामर्शी को हटा दिया जाय। क्योंकि उन्होंने काफी देर कर दिया है। उन दो परामर्शियों से एक परामर्शी हाईकोर्ट गया। हाईकोर्ट ने आर्बिट्रेशन एक्ट के तहत एक अवकाश प्राप्त न्यायाधीश को आरबिट्रेटर नियुक्त किया। आरबिट्रेटर ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला दिया कि ओआरजी परामर्शी को हटाने का फैसला सही नहीं था। नगर विकास विभाग ने ग्लोबल टेंडर के आधार पर पुनः निविदा निकाल कर मेनहर्ट नामक एक परामर्शी का चयन कर लिया है। श्री राय ने बताया कि ग्लोबल टेंडर में विश्व बैंक के मानदंडों के हिसाब से त्रिस्तरीय निविदा पद्धति होती है। किंतु उस पद्धति का भी पालन नहीं किया गया। उस समय से आज तक रांची में सिवरेज-ड्रेनेज का निर्माण नहीं हुआ।

लेखक ने कहा कि यह पुस्तक बुद्धिजीवियों, चिंतकों, समाज सुधारकों को आत्ममंथन करने पर बाध्य करेगी। यह पुस्तक मुख्य रूप से राजधानी रांची में सिवरेज-ड्रेनेज की रूपरेखा बनाने के लिए परामर्शी बहाल करने में की गई अनियमितता के ऊपर आधारित है। इस पुस्तक के सभी तथ्य एवं आंकड़े सरकारी दस्तावेजों, जांच समितियों के प्रतिवेदन, तत्कालीन विधान सभा अध्यक्ष इन्दर सिंह नामधारी द्वारा गठित कार्यान्वयन समिति की प्रतिवेदन पर आधारित है। पुस्तक के शीर्षक ‘लम्हों की खता’ में ही इस पुस्तक का सार छुपा हुआ है। लम्हों की खता के कारण ही आज रांची शहर उसका खामियाजा भुगत रहा हैं। यह सिलसिला न जाने कब समाप्त होगा ?

मंच का संचालन युगान्तर भारती के कार्यकारी अध्यक्ष अंशुल शरण ने किया और स्वागत पुस्तक के  प्रकाशक एवं नेचर फाउंडेशन के ट्रस्टी निरंजन सिंह ने किया। धन्यवाद युगान्तर भारती के सचिव आशीष शीतल ने किया गया। पुस्तक विमोचन के अवसर पर झारखंड हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव कुमार, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व खाद्य आपूर्ति सलाहकार बलराम, भारतीय जन मोर्चा के धर्मेंद्र तिवारी, संजीव आचार्य, रामनारायण शर्मा, अजय सिन्हा आदि उपस्थित थे।

Leave A Reply

Your email address will not be published.