आईसीटी टूल्स माध्यमों से सभी केवीके प्रसार गतिविधियों को बढावा दे : निदेशक

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दैनिक झारखंड न्‍यूज

रांची । बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के प्रभारी प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ जगरनाथ उरांव ने जिलों में स्थित कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) को प्रशिक्षण, कर्मशाला, कार्यशाला आदि जैसी प्रसार गतिविधियों को आईसीटी टूल्स के माध्यमों से गति देने पर बल दिया है। उन्होंने कोविड–19 की वजह से ऑन कैंपस प्रशिक्षण को ऑनलाइन चालू बनाये रखने, चालू खरीफ मौसम में किसानों तक विभिन्न उपादानों का वितरण सुनिश्चित करने, परियोजनाओं की अधिकतम राशि का किसानोपयोगी कार्यक्रमों में उपयोग करने को कहा। डॉ उरांव 31 जुलाई को गूगल मीट के माध्यम से विश्वविद्यालय के सभी 16 कृषि विज्ञान केंद्रों की समीक्षा कर रहे थे।

200 हेक्टेयर भूमि में बीज उत्पादन कार्यक्रम चलाए

डॉ उरांव ने बताया कि चालू खरीफ मौसम में सभी केवीके को फ्रंट लाइन प्रत्यक्षण, ऑनफार्म ट्रायल एवं कम्यूनिटी फ्रंट लाइन प्रत्यक्षण कार्यक्रमों को शत प्रतिशत पूरा करना है। 16 केवीके के प्रधानों ने बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत 60 हेक्टेयर भूमि में चावल और 10-10 हेक्टेयर भूमि में दलहन एवं तेलहन बीज उत्पादन कार्यक्रम चलाने और सीड विलेज कार्यक्रम के तहत किसानों के पारस्परिक सहयोग से 200 हेक्टेयर भूमि में बीज उत्पादन कार्यक्रम चलाए जाने की बात कही। प्रदेश के बोकारो, पूर्वी सिंहभूम और पलामू में दलहन सीड हब कार्यक्रम के तहत करीब 100-100 हेक्टेयर भूमि में अरहर, उरद एवं कुल्थी बीज उत्पादन तथा चतरा, पलामू और पूर्वी सिंहभूम जिले में जलवायु आधारित निकरा कार्यक्रम के प्रगति के बारे में बताया। चतरा और पूर्वी सिंहभूम ने युवाओं को कृषि में आकर्षित करने की आर्या योजना और लोहरदगा, पलामू और चतरा ने बायोटेक किसान हब कार्यक्रमों के बारे में बताया।

जिले में 50  सूकर पालन ईकाई स्‍थापित की जाएगी

केवीके, लोहरदगा के प्रधान ने बताया कि भारतीय वेटरनरी सूकर संस्थान, कोलकाता ने सूकर पालन से किसानों की आय में बढ़ोत्‍तरी की योजना मिली है। इसमें जिले में 50  सूकर पालन ईकाई किसानों के यहां स्थापित की जायेगी। प्रत्येक ईकाई को 4 सूकरी और 1 सूकर दी जायेगी। समीक्षा बैठक में डॉ अशोक कुमार, डॉ श्रीकांत सिंह, डॉ ललित दास, डॉ अमृत झा, डॉ संजीव सिंह, डॉ रंजय कुमार सिंह, डॉ राजीव कुमार, डॉ सुधीर झा, डॉ पंकज सेठ आदि ने भाग लिया।

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