नई शिक्षा नीति से बढ़ेगा छात्रों का कौशल: डॉ आरएस कुरील

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  • पीआईबी-आरओबी के संयुक्त तत्वावधान में ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020’ पर वेबिनार का आयोजन

दैनिक झारखंड न्‍यूज

रांची । नई शिक्षा नीति में 21वीं सदी के भारत को तैयार करने पर बल दिया गया है। इसमें तकनीक के इस्तेमाल का ध्यान रखा गया है। पुरानी टेन प्लस टू शिक्षा की जगह नई प्रणाली 5+3+3+4 है। इसमें ध्‍यान रखा गया है कि प्राइमरी लेवल से ही गांव के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। उक्त बातें पत्र सूचना कार्यालय और रीजनल आउटरीच ब्यूरो के संयुक्त तत्वावधान में ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020’ विषय पर आयोजित वेबिनार में नई शिक्षा नीति निर्माण कमेटी 2020 के सदस्य और बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व प्रभारी कुपलपति डॉ आरएस कुरील ने 9 अगस्‍त को कही।

सभी छात्रों को जोड़ने पर बल

डॉ कुरील ने कहा कि नई शिक्षा नीति में सभी वर्ग के छात्रों को जोड़ने पर बल दिया गया है। यह समावेशी और न्याय संगत है। आज भी देश में करीब दो करोड़ बच्चे प्राथमिक शिक्षा से वंचित हैं। अब कक्षा छह से ही बच्चों को वोकेशनल ट्रेनिंग दी जा सकेगी, जिससे उनकी प्रतिभा को जल्द पहचानने में मदद मिलेगी। नई शिक्षा नीति में सृजनात्मकता और छात्रों में गहन सोच विकसित करने पर बल दिया गया है। कोशिश की गई है कि भाषा की दीवार गिरायी जाए, ताकि देश में एकीकरण हो सके। अच्छी शिक्षा के लिए अच्छे शिक्षकों की जरूरत को देखते हुए शिक्षकों के प्रशिक्षण का भी ध्यान रखा गया है। 2022 के बाद बिना पीएचडी के कोई सहायक प्रोफेसर नहीं बनेंगे।

देश की युवा पीढ़ी तैयार होगी

वेबिनार की अध्यक्षता कर रहे पीआईबी, रांची के अपर महानिदेशक अरिमर्दन सिंह ने कहा कि किसी भी देश और समाज के विकास के लिए स्वास्थ्य के बाद शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण योगदान है। 34 साल बाद देश में एक नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति आई है। आने वाले दिनों में इस नीति के क्रियान्वयन के आधार पर देश की युवा पीढ़ी तैयार होगी। इस नीति का देश के विकास और भविष्य में अहम योगदान होगा।

मील का पत्‍थर साबित होगी

रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ आरके पांडेय ने कहा कि कि नई नीति मील का पत्थर साबित होगी, जिसमें मातृभाषा में पठन-पाठन पर बल दिया गया है। यह एक स्वागत योग्य निर्णय है। अगर हम देखें तो सभी विकसित देश जैसे कि जापान, जर्मनी आदि मातृभाषा में ही शिक्षा प्रदान करते हैं। इससे छात्रों को जल्दी सीखने में मदद मिलती हैं, खास कर प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर। आज जब देश गांधी जी की 150वीं जयंती मना रहा है, यह सराहनीय बात है कि गांधी जी के विचारों को नई शिक्षा नीति में समाहित किया गया है। वोकेशनल शिक्षा पर बल भी नई शिक्षा नीति का एक स्वागत योग्य कदम है। एससी, एसटी समुदाय के छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के लिए स्कॉलरशिप की व्यवस्था एवं कला संस्कृति के विकास के लिए स्थानीय विषय वस्तु को बढ़ावा देने पर बल एक स्वागत योग कदम है।

जरूरतों के हिसाब से शिक्षा

रांची विश्वविद्यालय की प्रति कुलपति डॉ कामिनी कुमार ने कहा कि यह नई शिक्षा नीति हमारी परंपरा और संस्कारों को बरकरार रखते हुए 21वीं सदी के जरूरतों के हिसाब से आकांक्षीय शिक्षा देगी। नई नीति शिक्षकों को समाज का सम्माननीय और अनिवार्य सदस्य के रूप में फिर से स्थापित करेगा। जीडीपी का छह फीसदी शिक्षा पर खर्च करना नई शिक्षा नीति का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारण है जोकि सराहनीय प्रयास है।

विश्‍व गुरु बनने दिशा में कदम

नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ रामलखन सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति 21वीं सदी में भारत को फिर से विश्व गुरु बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। कक्षा छह से ही कौशल विकास पर ध्यान एक बहुत ही जरूरी और अहम बदलाव है। विश्व में अगर हम देखें तो कौशल विकास की दर जहां अमेरिका में 50% है, वहीं दक्षिण कोरिया में 85% है। हमारे देश में यह मात्र 6 फीसदी ही है। जब यह दर बढ़ेगी, तब हमारे छात्रों के अंदर सीखने की क्षमता बढ़ेगी। नई शिक्षा नीति में लचीलापन भी एक सराहनीय कदम है।

संरचना बहुत ही अच्‍छी है

श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ सत्यनारायण मुंडा ने कहा कि नई शिक्षा नीति की संरचना बहुत ही अच्छी है, लेकिन इसे प्रैक्टिकल तौर पर लागू करने में शिक्षकों को बहुत कार्य करना पड़ेगा। अक्सर हम सुनते हैं कि ग्रामीण इलाकों में शिक्षक कभी-कभी दो महीने तक भी पढ़ाने नहीं जाते। अब शिक्षकों को स्थानीय संस्कृति को समझने का प्रयास करना पड़ेगा। अगर कोई शिक्षक ऐसी जगह पर तैनात होता है तो उसे अपने आप को उस माहौल में ढालने की जरूरत पड़ेगी, ताकि वह छात्रों को उसी परिवेश में और उनसे जुड़े हुए ही उदाहरणों के जरिए उन्हें पढ़ा सके।

अनुसंधान पर बल दिया गया है

एनआईटी (जमशेदपुर) के निदेशक प्रो केके शुक्ल ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में अनुसंधान गहन विश्वविद्यालयों पर बल दिया गया है। देश में अभी तक अधिकतर शैक्षणिक गहन विश्वविद्यालय ही है, जहां पर एडमिशन लेना, शिक्षा देना और एग्जाम लेना, इसी पर अधिकतर ध्यान रह जाता है। कोरोना महामारी ने हमें कुछ नया सीखने की प्रवृत्ति दी है। ऑनलाइन शिक्षा भी अब समय की मांग हो चली है। हमने रियल टाइम ऑनलाइन शिक्षा के तहत अपने शिक्षकों को वीडियो क्लास देने को कहा जिसे रिकॉर्ड किया जाता है। हमारी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाता है, ताकि वह छात्रों तक आसानी से उपलब्ध हो उसके बाद हम छात्रों के लिए ऑनलाइन क्लेरिफिकेशन क्लास भी रखते हैं। हालांकि अभी भी हमारी  शैक्षिक व्यवस्था काफी बंद है। उसे और लचीला और ओपन बनाने की जरूरत है। हमें छात्रों को अन्य विषय पढ़ने की सुविधा भी देनी होगी, मल्टीपल एंट्री और एग्जिट भी नई शिक्षा नीति का एक अहम कदम है। इससे आने वाले समय में छात्रों को काफी लाभ होगा और उनका समय भी बर्बाद नहीं होगा।

वेबिनार में इन्‍होंने लिया भाग

वेबिनार में पीआईबी, आरओबी, एफओबी के सभी अधिकारी-कर्मचारियों के अलावा दूसरे राज्यों के भी अधिकारी-कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। वेबिनार का समन्वय क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी गौरव कुमार पुष्कर, संचालन क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी श्रीमती महविश रहमान और धन्यवाद क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी ओंकार नाथ पांडेय ने किया।

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