JPSC की धांधली : एक्ट के नॉर्म्स पूरे हुए बिना बन गये इंटरव्यू बोर्ड

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सुनील कमल

हजारीबाग । राज्‍य के विभिन्‍न विश्‍वविद्यालय में व्‍याख्‍ताओं की हुई नियुक्ति में झारखंड लोक सेवा आयोग ने कई तरह के नियमों उल्‍लंघन किया। इस क्रम में एक्‍ट के नॉर्म्‍स पूरे किये बिना ही इंटरव्‍यू बोर्ड बना दिया। इसके बाद 777 व्‍याख्‍याताओं की नियुक्ति की अनुशंसा कर दी गई। इनकी नियुक्‍ति‍ भी राज्‍य के विभिन्‍न विश्‍वविद्यालय में हो गई।

झारखंड लोक सेवा आयोग ने (विज्ञापन संख्या : 01/2007) के आलोक में राज्य के तीन विश्वविद्यालय में व्‍याख्याता की नियुक्ति की। ये नियुक्ति रांची विश्वविद्यालय (रांची), विनोबा भावे विश्वविद्यालय (हजारीबाग) और सिदो कान्हो मुर्मू विश्वविद्यालय (दुमका) में हुई। आयोग ने 777 व्‍याख्‍याताओं की नियुक्ति की अनुशंसा की। इसमें आश्चर्यजनक पहलू यह रहा कि‍ जिस इंटरव्यू बोर्ड ने नियुक्ति की अनुशंसा की थी, उसने यूजीसी एक्ट और सेंट्रल एक्ट के नॉर्म्स को पूरा नहीं किया था।

झारखंड बेट नेट एसोसिएशन की रिट (संख्या : 1059/2006) पर झारखंड उच्च न्यायालय ने हर हाल में यूजीसी एक्ट और सेंट्रल एक्ट के पालन करने का निर्देश दिया था। हालांकि आयोग ने एक्ट के अनुरूप इंटरव्यू बोर्ड का गठन हीं नहीं किया। बोर्ड में व्‍याख्‍याता के इंटरव्यू के लिए प्रोफेसर पद के लोगों को होना अनिवार्य था। परंतु आयोग ने व्‍याख्‍याता से ही व्‍याख्‍याता के इंटरव्यू कराये। बोर्ड में इंटर्नल एक्सपर्ट को दो दिन से ज्यादा किसी को नहीं रहने थे, परंतु एक इंटर्नल एक्सपर्ट दो महीने तक लगातार रहे।

नियम के मुताबिक एक्सटर्नल एक्सपर्ट को एक जगह से ज्यादा नहीं बुलाने थे, परंतु इंटरव्यू बोर्ड में थोक के भाव से गोड्डा, भागलपुर, दुमका, काशी विद्यापीठ, वाराणसी आदि जगहों से बुलाये गये थे। इंटरव्यू बोर्ड में सामान्य, ओबीसी, एससी,एसटी, महिला, दिव्यांग के प्रतिनिधि अवश्य होने थे, किंतु आयोग ने इसका ख्याल किसी भी बोर्ड में नहीं रखा। आयोग ने मन के मुताबिक बोर्ड का गठन कर व्‍याख्‍याताओं की नियुक्ति की।

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