JPSC की धांधली : बिहार में झारखंड के विलय की अभ्‍यर्थी उठाने लगे मांग

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दैनिक झारखंड न्‍यूज

रांची । झारखंड लोक सेवा आयोग की धांधली से अभ्‍यर्थी परेशान हो चुके हैं। लगातार नियमों की अनदेखी किये जाने और अनिमितताओं को लेकर उन्‍होंने झारखंड का विलय बिहार में किये जाने की मांग उठाई है।

जेपीएससी अभ्यर्थी उमेश प्रसाद का कहना है कि झारखंड में विधायिका जन आकांक्षाओं पर खरा नहीं उतर रहे हैं। जिस उद्देश्य को लेकर झारखंड का निर्माण हुआ था, उसपर रति भर का भी पूर्ति नहीं हो पाई है। एकीकृत बिहार के समय आदिवासी बाहुल्य वाले क्षेत्रों की उपेक्षा के कारण झारखंड राज्य की मांग की गई, ताकि सामजिक-आर्थिक-सांस्कृतिक- राजनीतिक रूप से जनता को समग्र विकास हो सके।

अभ्‍यर्थियों ने कहा कि राज्य गठन का 20 वर्ष के बाद युवा वर्ग में आक्रोश है। छात्रों को लेकर यहां की हर एक सरकार ने छला है। चाहे बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा, शिबू सोरेन, मधु कोड़ा, हेमंत सोरेन या रघुवर दास की सरकार हो। सबने आम छात्रों को नजरअंदाज किया है। इसका जीवंत उदाहरण जेपीएससी है। राज्य सेवा आयोग किसी भी राज्य के सबसे बड़े अधिकारि‍यों की नियुक्त करने वाला स्वायत्त संस्था होता है। वह खुली प्रतियोगिता के माध्यम से योग्य अधिकारियों का चयन करता है। देश का यह पहला राज्य है, जहां तमाम परीक्षाएं विवादों के घेरे में है। प्रथम से लेकर षष्टम जेपीएससी तक के मामले हाईकोर्ट में है।

पहला और द्वितीय जेपीएससी का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। पूर्व में आयोजित लेक्चरर, बाजार पर्यवेक्षक और अन्य नियुक्तियों पर भी विवादों है। किसी राज्य की शासन- प्रशासन व्यवस्था लोकप्रिय एवं स्थाई तब हो सकती है, जब योग्य प्रशासकों की नियुक्ति उचित और पारदर्शी व्यवस्था के तहत हो। इसके अभाव में राज्य की अवनति सुनिश्चित है।

अभ्यर्थि‍यों ने कहा कि यदि राज्य का विकास हुआ तो सिर्फ दो वर्ग (भ्रष्ट राजनेता और अधिकारी) सुदृढ़ और सशक्त हुए हैं। झारखंड का विलय को लेकर जेपीएससी अभ्यर्थी लामबंद होने लगे हैं। इस मुद्दे पर रीना सिंह, प्रभुदयाल लकड़ा, सुरेन्द्र पासवान, पंकज मौर्या, शाहिद अनवर, अमित सिन्हा, रानी कुमारी, मनोरंजन एवं सैकड़ों छात्र एकजुट हैं।

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