JPSC है कि मानता नहीं, हर बार दोहरा रहा है एक ही गलती, आदेश की परवाह नहीं

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दैनिक झारखंड न्‍यूज

रांची । झारखंड लोक सेवा आयोग ने राज्य के विश्वविद्यालयों में अधिकारियों की नियुक्ति के लिए 30 जून तक आवेदन आमंत्रित किये हैं। इस विज्ञापन को जारी कर आयोग ने अपनी लगातार की जा रही गलती को फिर से दोहराया है। दिव्‍यांगजन को आरक्षण से वंचित किया गया है। इसमें सुधार के लिए नि:शक्‍तता आयुक्‍त ने आयोग को पत्र लिखा है।

जानकारी हो कि झारखंड लोक सेवा आयोग ने विश्‍वविद्यालय में अधिकारियों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन (संख्या : 03/2020) निकाला है। इसमें दिव्‍यांगों को आरक्षण नहीं दिया गया है। दिव्यांगों को आरक्षण देने के लिए राज्य निःशक्तता आयुक्त ने निर्देश दिया है। हालांकि अब तक इसमें सुधार नहीं किया गया है।

सतीश चंद्रा

आयोग ने विश्वविद्यालय में अधिकारियों की नियुक्ति में अब तक किसी भी दिव्यांग कर्मी को आरक्षण नहीं दिया है। दिव्यांगजन कर्मी लगातार आरक्षण की मांग करते रहें। इस क्रम में आयोग ने राज्यपाल सचिवालय, राज्य निःशक्तता आयुक्त, संबद्ध विभाग के पदाधिकारियों की बात भी नहीं सुनी। इस बार की नियुक्ति प्रक्रिया में भी दिव्यांगजन को आरक्षण नहीं दिया गया है।

नियुक्ति में दिव्यांगजनों को आरक्षण देने की मांग को ले कर दिव्यांग अभ्यर्थी डॉ सुनील कुमार कमल ने राज्य निःशक्तता आयुक्त सतीश चंद्र को पत्र लिखा था। मामले को संज्ञान में लेते हुए आयुक्त ने झारखंड लोक सेवा आयोग के सचिव को पत्र लिखकर दिव्यांगजनों को आरक्षण देने की बात कही है। उन्होंने कार्मिक विभाग के संकल्प और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधान के अंतर्गत दिव्यांगजनों को नियुक्ति में चार प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही।

अभ्‍यर्थी का कहना है कि झारखंड उच्च न्यायालय की जनहित याचिका : 7525/2013 एवं सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसले दिव्यांगजनों के हित में आ चुके हैं। बावजूद इसके jpsc मानता नहीं है।

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