वर्तमान परिस्थतियों में खबरों की सत्यता की जांच बेहद जरूरी : आरएन मिश्रा

0
  • जल्दबाजी में बिना प्रामाणिकता के खबरें प्रकाशित करने से बचें : बलवीर दत्त
  • भ्रामक खबरें फैलाने वालों का पर्दाफाश करे मीडिया : अरिमर्दन सिंह
  • पत्र सूचना कार्यालय और प्रादेशिक लोक संपर्क ब्यूरो के तत्वावधान में वेबिनार

दैन‍िक झारखंड न्‍यूज

रांची । वर्तमान दौर में यह सवाल अहम है कि हम न्यूज और फेक न्यूज में कैसे अंतर करें? कोरोना वायरस के संक्रमण के शुरुआती दौर में देश में इसके इलाज के लिए कई आयुर्वेदिक दवाएं आने लगीं। जोर-शोर से मीडिया में उनका प्रचार होने लगा। लेकिन, वह कितनी असरदार होंगी, कितना फायदा पहुंचाएंगी, इसकी सत्यता की जांच नहीं हुई। इसलिए वर्तमान परिस्थतियों में खबरों की सत्यता की जांच करना बेहद जरूरी है। उपर्युक्त बातें पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) के पूर्वी जोन के महानिदेशक आरएन मिश्रा ने कहीं। श्री मिश्रा पीआईबी और आरओबी, रांची के तत्‍वावधान में 22 जुलाई को ‘कोविड-19 के प्रति जागरुकता फैलाने और फेक न्यूज का प्रसार रोकने में मीडिया की भूमिका’ विषय पर आयोजित वेबिनार को बतौर अध्यक्ष बोल रहे थे।

श्री म‍िश्रा ने कहा कि अगर हम फैक्ट चेक की बात करें तो यह पहले भी होता रहा है। पहले के पत्रकार पीटीआई, यूएनआई की खबरें प्राप्त होने के बाद भी उसमें दिए गए स्रोत या वक्ताओं से बात करते थे। आज के सोशल मीडिया और ब्रेकिंग न्यूज के दौर में ऐसा करना लोग उचित नहीं समझते। इन्हीं कारणों को ध्यान में रखते हुए पीआईबी द्वारा भी फैक्ट चेक यूनिट शुरू की गई है। यह एक रेगुलेटर के रूप में है, जो खबरों में दिए गए आंकड़ों और सत्यता को परखती है। इससे कम से कम अब पत्रकारों को यह लगता है कि उनके द्वारा दिए गए तथ्य सही होने चाहिए।

मुख्य वक्ता झारखंड के वरिष्ठ पत्रकार बलवीर दत्त ने कहा कि ‘फिट टू प्रिंट’ खबर ही प्रिंट मीडिया में छपती है। सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया में अंतर है। सोशल मीडिया पर जो न्यूज जारी करते हैं वह एडिटर नहीं होते, नाा ही उनकी कोई जिम्मेदारी बनती है, जबकि प्रिंट मीडिया में ऐसा नहीं है। कई बार फेक न्यूज ‘गुड फेथ’ में और कभी-कभी जानबूझ कर भी जारी की जाती है, जो खतरनाक है। जैसे कोरोना संक्रमण के शुरुआती दौर में यह खबर आई थी कि भारत एक गर्म देश है, जहां गर्मी आते ही कोरोनावायरस कम हो जाएगा या खत्म हो जाएगा। इसे मीडिया में भी काफी प्रमुखता दी गई, लेकिन सच्चाई इसके विपरीत ही निकली है। अतः हमें जल्दबाजी में बिना प्रामाणिकता के खबरों को प्रकाशित या प्रसारित करने से बचना चाहिए।

पीआईबी रांची के अपर महानिदेशक अरिमर्दन सिंह ने कहा कि देश में इंटरनेट और स्मार्टफोन के उपभोक्ताओं की संख्या में बढ़ोत्तरी के साथ ही सोशल मीडिया का उपयोग बढ़ा है। इसके माध्यम से फेक न्यूज में भी लगातार वृद्धि हो रही है। फेक न्यूज बहुत ही जल्दी फैलती है, जिससे लोगों तक तथ्यहीन और भ्रामक जानकारी पहुंच रही है। मीडिया को भ्रामक खबरें फैलाने वालों का पर्दाफाश करना चाहिए इससे लोगों में मीडिया के प्रति और विश्वास बढ़ेगा।

वर‍िष्‍ठ पत्रकार हरिनारायण सिंह ने कहा कि सूचना के इस दौर में कोई भी 24 घंटे खबरों के लिए इंतजार नहीं कर सकता। वह तुरंत सोशल मीडिया पर जाता है और वहां से जो भी जानकारी मिलती है वह उसे ग्रहण करता है। ऐसा नहीं है कि अफवाह सिर्फ आज के दौर में ही है। महाभारत काल में भी अफवाहों के बल पर युद्ध जीते गए। आज भी अगर हम देखें तो प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में खबरों और अफवाहों का एक वॉर चल रहा है। ऐसे में जरूरत है कि‍ कोरोना संक्रमण के दौर में प्रतिदिन कम समय के अंतराल में कोरोना से जुड़ी जानकारियां सरकारी तौर से जारी होना चाहिए। इससे अफवाहों का बाजार रुकेगा।

वरिष्ठ पत्रकार बैजनाथ मिश्र ने कहा कि अगर कोरोना संकट काल में हम फेक न्यूज की बात करें तो संक्रमितों की संख्या को लेकर कुछ 19-20 रिपोर्टिंग हो सकती है, लेकिन झारखंड में मीडिया, खास करके प्रिंट मीडिया, कभी भी फेक न्यूज नहीं छापता है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया भी इस समय काफी अच्छा काम कर रहा है। जो लोग फेक न्यूज फैलाते हैं वह इरादतन, आदतन या शरारतन पर ऐसा करते हैं, इससे छुटकारा पाने के लिए मीडिया को और सतर्क होकर काम करना पड़ेगा। कोरोना के इस समय में एक बात तो जरूर है कि यहां का मीडिया ईमानदारी से इस संकट की घड़ी में कार्य कर रहा है। आने वाली दिक्कतों को दरकिनार करके एक कठिन माहौल में भी अपना रोल बखूबी निभा रहा है। ब्रेकिंग न्यूज के चक्कर में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर नेगेटिव या सेंसेशनल न्यूज परोसा जाता है।

वरिष्ठ पत्रकार चंदन मिश्र ने कहा कि सोशल मीडिया का फैलाव जिस तरह हुआ है, उसके साथ ही भ्रामक खबरों का प्रसार भी बढ़ा है। हमें सोशल मीडिया पर इस तरह की खबरों से सचेत रहने की जरूरत है। खबरों के सही स्रोत तक पहुंचना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।

वरिष्‍ठ पत्रकार संजय मिश्र ने कहा कि फेक न्यूज जैसी कोई खबर हो यह नहीं हो सकता। हां यह है कि खबरों के तथ्य में कोई कमी हो सकती है। तथ्यहीन खबरें रोकने की जिम्मेवारी से कोई मीडिया मुकर नहीं सकता है। इसलिए जरूरी है कि सही स्रोत से उपलब्ध खबरें ली जाए और जारी किया जाए। मीडिया और सरकार का समन्वय जरूरी है। अगर कोरोना के समय में ऐसी खबरें आ रही हैं कि बेटा बाप का शव संक्रमण के डर से नहीं ले जा रहा है। उसका कोई और अंतिम संस्कार कर रहा है तो यह अफसोस जनक है। इसके बारे में भ्रांति को दूर करना जरूरी है, जिसके लिए समन्वित रूप से काम करना होगा।

रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के निदेशक मुकुंद चंद्र मेहता ने कहा कि कोरोना संक्रमण के प्रति लोगों में जागरुकता बढ़ाने के लिए हमारे छात्र-छात्राओं ने आस-पास के गांव मुहल्ले में जाकर लोगों को इससे बचने के तरीकों के विषय में जानकारी दी है। उन्हें मास्क लगाने, सामाजिक दूरी का पालन करने और संक्रमण से जुड़े अन्य मुद्दों के प्रति जागरुक किया गया है। कोरोना संक्रमण से जुड़ी अफवाहों को उजागर करने में भी मीडिया का काम सराहनीय रहा है।

वेबिनार के दौरान रांची व‍िव‍ि के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के शिक्षक और छात्रों ने उपर्युक्त विषय से जुड़े कई सवाल पूछे, जिनका वक्ताओं ने जवाब भी दिया। वेबिनार का संचालन क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी (गुमला) श्रीमती महविश रहमान ने किया। समन्यव क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी (डालटनगंज) गौरव कुमार पुष्कर और क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी (धनबाद) ओंकार नाथ पांडेय ने किया। वेबिनार में पीआईबी कोलकाता, पटना, ओडिशा, आरओबी पटना, रांची, दूरदर्शन, आकाशवाणी, एफओबी डालटनगंज, गुमला, धनबाद, दुमका, गया के क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी, क्षेत्रीय प्रचार सहायक, तकनीकी सहायक सहित अन्य कर्मचारियों ने भी शिरकत की।

Leave A Reply

Your email address will not be published.