जनजातीय बहुल क्षेत्रों में आजीविका कार्यक्रमों और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की पहल

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  • जनजातीय कार्य और ग्रामीण विकास मंत्रालय के बीच समझौते पर हस्ताक्षर

दैनिक झारखंड न्‍यूज

नयी दिल्ली/रांची । देश के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में आजीविका कार्यक्रमों और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की पहल की गई है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समन्वय के साथ मजबूती देने के उद्देश्य से 18 अगस्‍त को जनजातीय कार्य, ग्रामीण विकास, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालयों की बैठक हुई। इसमें महिलाओं की एसएचजी को और मजबूती देने और उनके स्किल डेवेलपमेंट पर चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि देश में लगभग 66 लाख महिलाओं के साथ स्वयंसेवी संस्थानों में लगभग 7.20 करोड़ सदस्य हैं। इसीलिए आज ना केवल आजीविका के लिए, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण के लिए भी इन चारों मंत्रालयों की योजनाओं में जबरदस्त क्षमता व्याप्त है।

इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्रालय और ग्रामीण विकास मंत्रालय के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किये गये। समझौते के तहत विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जनजातीय बहुल क्षेत्रों में आजीविका कार्यक्रमों और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक समन्वयवादी दृष्टिकोण को मजबूत करना है। इन योजनाओं में दीनदयाल अंत्योदय योजना- एनआरएलएम, मनरेगा, पीएम आवास योजना-ग्रामीण, पीएम ग्राम सड़क योजना भी शामिल हैं। ग्रामीण विकास की अनुदान योजना और अनुच्छेद के तहत अनुदान, जनजातीय मामलों के लिए विशेष केंद्रीय सहायता और जनजातीय उपयोजना के माध्यम से मिलेगी।

जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने आजीविका के अवसरों की उपलब्धता बढाने, ग्रामीण और वनउपजों के मूल्यवर्धन को बढ़ाते हुए, आत्मनिर्भर भारत बनाने की पहल का स्वागत किया। उन्होंने समग्र विकास की दृष्टि से मौजूदा कमियों की पहचान करने और उन्हें पूरा करने पर भी जोर दिया है। जनजातीय कल्याण कार्यक्रमों के सामाजिक अंकेक्षण के लिए एक विशेष तंत्र के माध्यम से पेसा अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन के पहलू पर भी उनके द्वारा महत्वपूर्ण तथ्यों को उजागर किया गया।

खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने आशा जतायी कि ग्रामीण खाद्य उत्पादों के मूल्य संवर्धन के साथ ग्रामीणों के आय के स्तर को और बढ़ाया जा सकता है।

ग्रामीण विकास और कृषि-किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने एसएचजी ने लगभग 3 लाख करोड़ के बैंक ऋण का लाभ उठाया है। उसके माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को प्रभावी रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चारों मंत्रालयों के बीच एक समन्वय से ग्रामीण और जनजातीय अर्थव्यवस्था में वृद्धि होगा।

जनजातीय कार्य मामलों की केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह सरुता ने इस समझौते को महिला सशक्तिकरण के लिए एक प्रभावी उपकरण बताया।

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