फेडरेशन ने राष्‍ट्रीयकरण की मनाई वर्षगांठ, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की रक्षा का संकल्‍प

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दैनिक झारखंड न्‍यूज

रांची । बैंक इंप्‍लोई फेडरेशन, झारखंड के सदस्‍यों ने 19 जुलाई को बैंकों के राष्‍ट्रीयकरण की 51वीं वर्षगांठ मनाई। इस अवसर पर बेफी झारखण्ड कार्यालय के समीप सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए सभा किया गया। बैंकिंग उद्योग के इतिहास एवं विकास पर परिचर्चा हुआ। सदस्‍यों ने कहा कि स्‍वतंत्रता प्राप्ति के 22 वर्षों के बाद निजी क्षेत्र के लगभग 600 से जयादा बैंक फेल हो गये। आम जनता का पैसा डूब गया।

ऐसे में भारत की आम जनता एवं ट्रेड यूनियन के सतत संघर्ष के बाद तत्कालीन केंद्र सरकार को विवश होकर 19 जुलाई 1969 में 14 सरकारी क्षेत्र को बैंको और 1980 में अन्य 6 बैंकों का राष्ट्रीयकरण करना पड़ा। इतना ही नहीं, 1970 में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की भी स्‍थापना करनी पड़ी। राष्ट्रीयकरण के समय बैंकिंग उद्योग के पास लगभग 8000 करोड़ रुपये का व्यवसाय था, जो आज 1.38 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी से हजारों बैंक फेल हो गए। लेहमन ब्रदर्स जैसे स्थानों को सड़क पर आना पड़ा तो भी सरकारी क्षेत्र के बैंक सुरक्षित रहे।

सभा में केंद्र सरकार द्वारा बैंकों के विलयन और निजीकरण किये जाने का विरोध किया गया। पिछले दिनों केंद्र सरकार द्वारा को ऑपरेटिव बैंको के लिए लाए गये अध्यादेश की निन्दा की गई। इसे तत्‍काल वापस लेने की मांग की गई। सभा को अभिजित मल्‍ल‍िक, केआर चौधरी, रुपा खलखो, जे गुड़ि‍या, ओपी उपाध्‍याय, रंजन सहाय, एमएल सिंह, बेरोनिका ताम्‍बा, सीटू के महामंत्री प्रकाश विप्‍लव आदि ने संबोधित किया। सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों की रक्षा का संकल्‍प लिया गया।

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