पारंपरिक कृषि को छोड़ व्यवसायिक खेती को अपना रहे किसान, बढ़ रही आमदनी

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  • लाख की खेती कर बन रहे आत्मनिर्भर

दैनिक झारखंड न्‍यूज

रांची । किसान पारंपरागत खेती को छोड़ रहे हैं। वे व्‍यवसायिक खेती को अपना रहे हैं। इससे उनकी आमदनी में काफी इजाफा हो रहा है। आर्थिक स्थिति सुधर रही है। इसे ध्‍यान में रखकर कई किसान अब लाख की खेती करने लगे हैं।

रांची जिले के ओरमांझी प्रखंड के किसान इन दिनों लाख की खेती कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। यहां के किसानों का कहना है कि परंपरागत कृषि से हटकर व्यवसायिक खेती करने से आमदनी में कई गुना वृद्धि हो रही है।

प्रखंड के कई किसान लाख की खेती से जुड़ रहे हैं। इसकी खेती से होने वाले मुनाफे को देखते हुए आने वाले दिनों में ओरमांझी प्रखंड में 300 एकड़ भूमि तक इसे बढ़ाने की योजना है। पिछले 2 सालों से लाख की खेती कर रहे जगनू उरांव को इसकी खेती करने में सरकारी योजनाओं का भरपूर लाभ मिला है। लाख की खेती से होने वाली कमाई से वह काफी खुश हैं।

लाख की खेती में जगनू उरांव और अन्य किसानों के लिए भी पथ प्रदर्शक का काम करते हैं। कृषि के गुर सीखने के लिए रांची, खूंटी और सिमडेगा समेत कुछ अन्य जिलों के किसान इनसे हमेशा संपर्क में रहते हैं।

लाख की खेती की बारीकियों को समझने के लिए जगनू उरांव के खेत पर पहुंचे रंजीत साहू और आमोस टोप्पो इस काम को फायदेमंद बताते हैं। इनका कहना है कि लाख की खेती से जुड़कर वह अपनी आय में काफी हद तक बढ़ोत्‍तरी कर सकते हैं।

झारखंड के लाख की डिमांड देश में तो है ही, विदेशों में भी इसकी मांग काफी अधिक है। लाख का इस्तेमाल चूड़ी, पेंट, वार्निश और गोंद समेत कई अन्य सामग्रियों में इसका किया जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो लाख को विदेशी मुद्रा अर्जित करने का एक अच्छा माध्यम भी बताया जाता है।

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