बीएयू में कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और खाद्य सुरक्षा मानकों को बढ़ावा देने पर जोर

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दैनिक झारखंड न्‍यूज

रांची । बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि संकाय के कार्यरत गृह विज्ञान विभाग में रागी (मडुआ), सोयाबीन, सब्जी और फलों का वैज्ञानिक तकनीक से प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन कर विभिन्न उत्पाद तैयार किये जाते हैं। आधुनिक वैज्ञानिक यंत्र और उपकरणों से सुसज्जित प्रयोगशाला में प्रशिक्षण के साथ–साथ महिला सशक्तिकरण के लिए गृह वाटिका आदि विषयों में अनेकों कार्यक्रम चलाये जाते हैं।

डीन एग्रीकल्चर डॉ एमएस यादव ने शुक्रवार एवं शनिवार को विभाग के कार्यो की समीक्षा की। उन्होंने कृषि कार्य को लाभकारी बनाने और किसानों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए उपेक्षित फसल और अतिपोषित अनाजों जैसे – बाजरा, ज्वार, जौ, कसावा, राजमा, बोदी, ओल, अदरख, जिमीकंद एवं शकरकंद आदि के प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन तकनीक को विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन एवं खाद्य सुरक्षा के नये आयामों को जोड़ने के साथ बाजार व्यवस्था के अनुरूप व्यावसायिक उत्पादन के आधुनिक तरीकों को बढ़ावा देने का निर्देश दिया।

विभागाध्यक्ष डॉ रेखा सिन्हा ने बताया कि यूजीसी से मान्यताप्राप्त ‘बैचलर ऑफ वोकेशनल इन ह्यूमन न्यूट्रीशन एंड डाईटेटिकस’ विषय पर वर्ष 2018-19 से तीन वर्षीय कोर्स भी चलाया जा रहा है। इसमें सीटो की संख्या 50 और न्यूनतम योग्यता 10 + 2 पास है। कोर्स के बाद छात्र देश के किसी भी संस्थानों में ह्यूमन न्यूट्रीशन तथा डाईटेटिकस पर उच्चतर शिक्षा में नामांकन ले सकते है। पंजीकरण कराकर डाइटीसि‍यन की प्रैक्टिस कर सकते है।

साथ ही कृषि संकाय में अध्ययनरत कृषि स्नातक पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष के छात्रों को 6 महीने के अनिवार्य अनुभवात्मक अधिगम कार्यक्रम के तहत प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन पर कार्यानुभव एवं प्रायोगिक ज्ञान से उद्यमिता के गुर से प्रशिक्षित किया जाता है। इस वर्ष छात्रों ने गेहूं, मड़ुआ (रागी), मकई, सोयाबीन, बाजरा, चना, ज्वार एवं चौलाई (एमेंरेनथश) के दानों के उपयोग से मल्टीग्रेन आटा बनाना और गेहूं, मड़ुआ (रागी), सोयाबीन, जौ, बाजरा, जई एवं फेनु ग्रीक के दाने के उपयोग से डायबे‍टिक फ्रेंडली आटा बनाना सीखा। मल्टीग्रेन आटा और डायबेटिक फ्रेंडली आटा की बिक्री की। बैंक के लिए डीपीआर बनाया।

वर्तमान में प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन की नवीनतम तकनीकों से रागी (मडुआ) से बिस्कुट, केक, सेवई और सोयाबीन से टोफू (पनीर) का उत्पाद तैयार किया जाता है। साथ ही मशरूम के आचार, टोमेटो कैचप, सब्जियों के आचार, फलों के जैम एवं जेली के निर्माण कार्य के साथ प्रशिक्षण दिया जाता है।

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