राष्‍ट्रीय शैक्षिक महासंघ की रांची जिला इकाई की बैठक में शिक्षकों की समस्‍या पर चर्चा

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दैनिक झारखंड न्‍यूज

रांची । राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ झारखंड प्रदेश (प्राथमिक प्रकोष्ठ) की रांची जिला इकाई की वर्चुअल मीटिंग 25 अगस्‍त को हुई। इसमें स्‍थानांतरण, प्रोन्‍नति सहित शिक्षकों की कई समस्‍याओं पर चर्चा की गई। सदस्‍यों ने सांगठनिक विषय पर चर्चा करते हुए सरकार की शिक्षक विरोधी नीतियों की कड़ी निंदा की। यथाशीघ्र इसका समाधान करने की अपील की।

वर्चुअल मीटिंग में राज्य के सह संयोजक विजय बहादुर सिंह, प्रदेश मीडिया प्रभारी अरुण कुमार दास सहित रांची जिले से शिक्षक प्रतिनिधियों में रीता सिंह, रीता दुबे, संगीता रानी, नीलम सिंह, राम भूषण झा, समीर श्रीवास्तव, राजन सहाय, उदय कुमार, आनंद ठाकुर, अरविंद लाल, राकेश श्रीवास्तव ,अरविंद कुमार लाल, गौतम दास आदि उपस्थित थे।

इन बिंदुओं पर चर्चा

  • विभाग द्वारा शिक्षकों के स्थानांतरण के संबंध में जिले में स्थित विद्यालयों को पांच जोनों में विभाजित किया गया है। इसमें कई विसंगतियां हैं।
  • वर्ष 2016 में नियुक्त नवचयनित प्राथमिक शिक्षक के कनीय होने के बावजूद भी विभाग की गलत नीतियों के कारण उन्हें वरीयता का लाभ मिल रहा है। इससे 15 से 20 वर्ष के वरीय शिक्षक विक्षुब्ध हैं।
  • रांची जिला समेत राज्य के लगभग सभी जिले के विद्यालय प्रधानाध्यापक विहीन हो चुके हैं, जो राज्य सरकार की शिक्षा के प्रति उदासीनता बयान करती है।
  • राज्य के कई एक जिलों में लगभग 30-30 वर्षों से प्रोन्नति लंबित है। प्रोन्नति की आस लिए हुए कई शिक्षक तो काल के गाल में समा गए। बावजूद सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है।
  • कोरोना महामारी की आड में शिक्षकों को राज्य के सभी विभाग अपने मनमानी तरीके से मसलन बालू की अवैध ढुलाई को रोकने, सरकारी शराब के दुकानों में मजिस्ट्रेट की ड्यूटी समेत अन्यान्य कार्यों में बिना उनके पैतृक विभागों को संज्ञान में लिए धड़ल्ले से प्रतिनियुक्त कर रहे हैं, जिसे शिक्षक पालन करने को विवश हैं।
  • वर्ष 2006 में छठे वेतनमान के अनुरूप निर्धारित उत्क्रमित वेतनमान के लिए फिटमेंट टेबल को राज्य सरकार के आज तक लागू नहीं करने से राज्य के सभी प्राथमिक शिक्षक ठगे महसूस कर रहे हैं।
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