विरोध सप्ताह पर झारखंड में 20 लाख लोगों से संपर्क करेगी माकपा

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  • गांव स्तर तक अभियान शुरू

दैनिक झारखंड न्‍यूज

रांची । प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बिना तैयारी के एकतरफा तरीके से घोषित लॉकडाउन देश में कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने में बेअसर साबित हुआ है। स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। महामारी का वैज्ञानिक तरीके से मुकाबला करने, स्वास्थ्य सुविधाओं को पुख्ता करने, हेल्थ कर्मियों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने, बड़े पैमाने पर टेस्टिंग करने जैसे काम में सरकार विफल रही है। लॉकडाउन में रोज मजदूरी करने वालों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। बड़े पैमाने पर लोगों के रोजगार खत्म हो गए हैं। बढ़ती भूख और कंगाली ने देश के गरीबों का जीना मुहाल कर दिया है।

केंद्र सरकार ने तुरंत लोगों को नकद पैसे का हस्तांतरण करने और मुफ्त अनाज देने से इंकार कर जनता की तकलीफों एवं दुखों को बढ़ा दिया है। अब इस महामारी पर काबू पाने में विफल रहने के बाद केंद्र सरकार ने अपनी सारी जिम्मेवार और समस्याओं का बोझ राज्य सरकारों पर डाल दिया है। इतना ही नहीं अब मोदी सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ का जुमला उछाल कर हमारे देश की राष्ट्रीय संपदा को देशी-विदेशी कारपोरेट घरानों के हवाले करने की साजिश कर रही है।

इस पृष्ठभूमि में माकपा ने जनता के ज्वलंत मुद्दों से संबंधित 16 सूत्री मांगों को लेकर पूरे देश मे व्यापक अभियान चलाए जाने का आह्वान किया है। झारखंड में इस अभियान की शुरुआत 20 अगस्त से हो गई। यह 26 अगस्‍त तक विरोध सप्‍ताह के रूप में मनाया जाएगा। इस दौरान राज्‍य के 20 लाख लोगों को पार्टी संपर्क करेगी। 26 अगस्त को प्रखंड से लेकर प्रमंडल तक अधिकारियों के पास राष्ट्रपति को संबोधित मांगों का स्मार-पत्र सौंपा जाएगा।

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