खानों में धूल नियंत्रित करने के लिए सीएमपीडीआई ने डिजाइन किया बिंडब्रेक और वर्टिकल ग्रीनरी सिस्टम

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दैनिक झारखंड न्‍यूज

रांची । वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान सीएमपीडीआई और जीएसआई ने संयुक्त प्रयास से देश के पूर्ववर्ती कोयला धारक क्षेत्र को 19,400 वर्ग किलोमीटर से बढ़ाकर 62 कोयला क्षेत्रों को कवर करते हुए लगभग 32,760 वर्ग किलोमीटर कर दिया है। पूर्ववर्ती कोयला धारक क्षेत्र में 59 प्रतिशत की वृद्धि से देश के लगभग 13700 वर्ग किलोमीटर में कोयला उत्खनन गतिविधियों का विस्तार होगा। भविष्य में देश की कोयले की जरूरत को पूरा करने में मदद मिलेगी। वर्ष 2019-20 के दौरान लगभग 292 वर्ग किलोमीटर वर्ग क्षेत्र का विस्तृत गवेषण के जरिए लगभग 7.77 बिलियन टन कोयला संसाधन को प्रमाणित श्रेणी में जोड़ा गया, जो सीएमपीडीआई द्वारा अपने स्थापना काल से 1 वर्ष में अब तक सर्वाधिक प्राक्कलित कोयला संसाधन है। 140 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में प्रोमोशनल गवेषण के जरिए लगभग 9.75 बिलियन टन नए संसाधन का आकलन किया गया। स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण के बाद उक्त बातें सीएमपीडीआई के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक एस सरन ने कही। इस अवसर पर निदेशक (तकनीकी/ईएस) केके मिश्रा, निदेशक (तकनीकी/आरडीएंडी) आरएन झा, निदेशक (तकनीकी/पीएंडडी) एके राणा, निदेशक (तकनीकी/सीआरडी) एसके गोमास्ता, मुख्य सतर्कता अधिकारी सुमीत कुमार सिन्हा, क्षेत्रीय संस्थान-3 के क्षेत्रीय निदेशक मनोज कुमार सहित सीएमपीडीआई परिवार के सदस्य उपस्थित थे।

श्री सरन ने कहा कि कोल इंडिया ने वर्ष 2019-20 में 660 मिलियन टन की तुलना में 602 मिलियन टन उत्पादन किया। कोविड-19 के कारण उत्पन्न विश्वव्यापी महामारी के बावजूद सीएमपीडीआई ने 14 लाख मीटर एमओयू लक्ष्य के मुकाबले विस्तृत गवेषण के तहत 12.94 लाख मीटर ड्रिलिंग की है। सीएमपीडीआई द्वारा कुल 276 रिपोर्ट तैयार की गई, जिसमें प्रमाणित श्रेणी में 7.77 बिलियन टन अतिरिक्त कोयला संसाधन प्रमाणित करते हुए 25 भूवैज्ञानिक रिपोर्ट दी गई। इसमें लगभग 178 मिलियन टन कैपेसिटी एडीशन वाली 32 परियोजना रिपोर्ट और 52 फॉर्म-1/ईएमपी शामिल हैं। खान से रेलवे साइडिंग तक कोयले की ढुलाई के मेकेनाइजेशन और रेल वैगन में स्वचालित लदान के लिए सीएमपीडीआई द्वारा 35 एफएमसी प्रोजेक्ट्स शुरू किया गया है, जिससे लगभग 406 मिलियन टन प्रति वर्ष कोयले का डिस्पैच किया जाएगा। सीएमपीडीआई में स्थापित एमएस प्रोजेक्ट सर्वर के जरिए नवंबर, 2019 से ही फर्स्‍ट माइल कनेक्टिविटी (एफएमसी) परियोजना की मॉनिटरिंग शुरू की जा चुकी है।

सीएमपीडीआई द्वारा पहली बार एनसीएल के केंद्रीय अस्पताल सिंगरौली के लिए अपशिष्ट की ईटीपी के लिए योजना बनाई गई है। कोयला मंत्रालय के लिए एसडीसी रिपोर्ट को अंतिम रूप देकर सुपुर्द कर दिया गया। एमसीएल की लखनपुर, भुवनेश्वरी और कुलदा खानों के लिए विभिन्न खनन कार्यों से उत्पन्न क्षणिक धूल को नियंत्रित करने के लिए बिंडब्रेक और वर्टिकल ग्रीनरी सिस्टम का डिजाइन किया गया है। कोल इंडिया लिमिटेड की विभिन्न सहायक कंपनियों की 242 प्रोजेक्ट्स की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा रही है। कोयला मंत्रालय द्वारा भी इस पोर्टल की मॉनिटरिंग की जा रही है। विवेच्य वर्ष के दौरान सीएसआर पर 3.07 करोड़ रुपये खर्च किए गए। वहीं चालू वित्त वर्ष के लिए सीएसआर कार्य के लिए 5 करोड़ का वार्षिक योजना है, जिसके अनुसार कार्य किया जा रहा है।

श्री सरन ने कहा कि कोल सेक्टर में अनुसंधान एवं विकास के कार्य में जगन्नाथ ओसीपी, एमसीएल के बैकफील्ड क्षेत्र पर एसएंडटी परियोजना के तहत आवास और कार्यालय के उपयोग के लिए ओबी डम्प का प्रयोग कर भवन का निर्माण, परंपरागत एक्सप्लोसिव जैसे एसएमई की तुलना में सीआईएल की खानों में एएनएफओ एक्सप्लोसिव की टेक्नो इकोनॉमी इफीकेसी स्थापित की गयी है। एक अन्य आरएंडडी परियोजना में थर्मल पावर प्लांट के लिए 34 प्रतिशत राख के साथ स्वच्छ कोयले का उत्पादन करने के लिए एयर फ्लूआईडीजेशन वाइब्रेटिंग डेक सेपरेटर तकनीकी द्वारा एमसीएल में गैर-कोकिंग कोयले के ड्राई परिष्करण का अध्ययन किया गया है। इस अवसर पर कोविड-19 महामारी से अग्रिम पंक्ति पर लड़ने वाले डॉक्टर्स, सीएसआर के नोड्ल अधिकारी सहित कुल स्वास्थ्य कर्मी, सफाईकर्मी एवं सुरक्षा कर्मी जिनमें नियमित एवं ठेकाकर्मी को कोरोना योद्धा पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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