रिम्‍स के बाद CCL के गांधीनगर कोविड अस्‍पताल की बदहाली आयी सामने

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  • भर्ती मरीजों ने बताई पीड़ा, डॉक्‍टर नहीं आते देखने
  • नर्स और वार्ड ब्‍यॉय के भरोसे हो रहा है इलाज

दैनिक झारखंड न्‍यूज

रांची । रिम्‍स के बाद सीसीएल के गांधीनगर कोविड अस्‍पताल की बदहाली सामने आयी है। यहां भर्ती कोरोना मरीजों को वार्ड में देखने डॉक्‍टर नहीं के बराबर आते हैं। नर्स और वार्ड ब्‍यॉय के भरोसे मरीजों को छोड़ दिया गया है।

डॉक्‍टर नहीं आते हैं

सीसीएल के गांधीनगर केंद्रीय अस्‍पताल के जुबली ब्लॉक में भर्ती कोरोना मरीजों में एक की हार्ट सर्जरी हुई है। बीते 4 दिनों से वे वार्ड में भर्ती हैं। उन्‍होंने अपने परिजनों को फोन कर बताया कि शनिवार को चौथे दिन भी कोई डॉक्टर उन्‍हें अभी तक देखने नहीं आये है। सिर्फ नर्स देखभाल करती है। मरीजों को किसी प्रकार की इमरजेंसी होती है, तभी डॉक्टर आकर देखते हैं।

नर्स के सहारे मरीज

इलाजरत मरीजों का कहना है कि डॉक्टर की भी एक रूटीन होनी चाहिए। दिन में कम से कम एक बार डॉक्‍टर को वार्ड में आकर मरीजों को देखना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। इस बारे में सीएमएस डॉ सीपी धाम से भी परिजनों ने बात की गई थी। डॉ धाम ने कहा कि पेशेंट नर्स को तकलीफ बताएगा। नर्स डॉक्टर को कॉल करेगी या उसका सिम्टम्स के हिसाब से डॉक्टर फोन पर इंस्ट्रक्शन देंगे। परिजन का कहना है कि यह गलत बात है। समाज डॉक्टरों को कोरोना योद्धा बता रहे हैं। उनका फूल माला से सम्‍मान हो रहा है, जबकि वे वार्ड में बहुत कम ही आते हैं। नर्से और वार्ड ब्‍यॉय के सहारे वहां पर मरीज पड़े रहते हैं। जानकारी के मुताबिक शनिवार को 3 स्टाफ नर्स और वार्ड ब्‍यॉय की पीपीई कि‍ट काम करते-करते फट गयी। अब उन्‍हें भी डर लग रहा है।

डरे हुए हैं कालोनी के लोग

कालोनी के भीतर कोविड अस्‍पताल बनाये जाने से यहां के लोग डरे हुए हैं। उनका कहना है कि हर रोज मरीज को लेकर गाड़ी गांधीनगर अस्पताल में आती और जाती है। जब से करोना वार्ड खुला है, तब से सिर्फ एक या 2 बार ही सेनिटाइजेशन किया गया है। हर रोज गांधीनगर गेट से गांधीनगर हॉस्पिटल के गेट तक अगल-बगल के क्‍वार्टर तक सब कुछ दिन में एक बार तो सेनिटाइज होना ही चाहिए। हालांकि ऐसा नहीं हो रहा है।

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