ग्रामीण फुटबॉल टूर्नामेंट के जरिए खेल प्रतिभा को तलाश रहा सीसीएल

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दैनिक झारखंड न्‍यूज

रांची । सीसीएल के तत्‍वावधान में 16 जुलाई को कंपनी के बीएंडके क्षेत्र स्थित करगली ग्राउंड में ग्रामीण फुटबॉल टूर्नामेंट शुरू हुआ। इसका शुभारंभ सीसीएल सीएमडी गोपाल सिंह ने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर किया। टूर्नामेंट में 16 टीमें बालक वर्ग और 2 टीम बालिका वर्ग में भाग ले रही है। इसमें बीएंडके सीएसआर कमांड क्षेत्र के अंतर्गत विभिन्‍न गांवों की टीम है। सभी मैच नॉक आउट आधारित है। प्रत्‍येक मैच में मैन ऑफ द मैच दिया जायेगा।

उदघाटन मैच अरबिन्‍दो क्‍लब और बोकारो कोलियरी के बीच खेला गया, जो प्रतिस्‍पर्द्धात्‍मक था। दूसरा प्रदर्शनी मैच बलिका वर्ग की दोनों टीमों के बीच खेला गया। दोनों मैच की प्रत्येक टीम के पांच सर्वश्रेष्ठ खिलाडि़यों को सम्‍मानित किया गया।

इस अवसर पर मुख्‍य अतिथि गोपाल सिंह ने कहा कि झारखंड बच्‍चों में इतनी प्रतिभा है कि उन्‍हें समुचित अवसर मिलें तो वे अपने परिवार, झारखंड सहित पूरे राष्‍ट्र का नाम रौशन कर सकते हैं। झारखंड की खेल प्रतिभा को तराशने की जिम्मेदारी हम सबकी है। युवा प्रतिभागियों को प्रोत्‍साहित करते हुए कहा कि आप सभी पूरी लगन, मेहनत और दृढ़ संकल्‍प के साथ अपने लक्ष्‍य की ओर बढ़े।

ज्ञातव्‍य हो कि सीसीएल सीएमडी के मार्गनिर्देंशन में कंपनी के कमांड क्षेत्रों में ग्रामीण फुटबॉल टूर्नामेंट के माध्‍यम से ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभावान खिलाडि़यों को खोजने और उन्‍हें तराशने के लिए सीसीएल के सभी क्षेत्रों में इस तरह का आयोजन किया जा रहा है। सीसीएल कोयला उत्‍पादन के साथ-साथ समाज और राष्‍ट्र के समावेशी विकास के लिए सदैव तत्‍पर है। इस दिशा में खेल विकास एक महत्‍वपूर्ण एवं सशक्‍त कड़ी है। सीसीएल विभिन्‍न योजनाओं के माध्‍यम से जैसे कि जेएसएसपीएस (सीसीएल एवं झारखंड सरकार की एक संयुक्‍त पहल), ग्रामीण फुटबॉल टूर्नामेंट, समर कैम्‍प आदि के माध्यम इस दिशा में काम कर रहा है।

इस अवसर पर सीसीएल मुख्‍यालय से महाप्रबंधक (कल्‍याण) विमलेन्‍दु कुमार, महाप्रबंधक (बीएंडके) एमके पंजाबी, महाप्रबंधक (कथारा) पी चन्‍दा, महाप्रबंधक (ढोरी) पी वाजपेयी और क्षेत्रीय सीसीएल कर्मी, श्रमिक प्रतिनिधि सहित दर्शकों ने फुटबॉल मैच का आनंद उठाया। स्‍वागत महाप्रबंधक (बीएंडके) एमके पंजाबी ने किया। टूर्नामेंट को सफल बनाने में प्रबंधक (खेल) आदिल हुसैन एवं स्‍थानीय प्रबंधन सहित ग्रामीणों का भी योगदान रहा।

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