ग्रामीण कृषि कार्यानुभव पाठ्यक्रम में भाग लेंगे BAU के अंतिम वर्ष के स्नातक छात्र

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  • विश्वविद्यालय के 221 छात्र –छात्राएं लेंगे भाग

दैनिक झारखंड न्‍यूज

रांची । बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के चार कृषि कॉलेजों में बैचलर साइंस इन एग्रीकल्चर के चार वर्षीय कोर्स का संचालन हो रहा है। इस वर्ष इन कॉलेजों में कृषि शिक्षा में अध्ययनरत कुल 221 छात्र–छात्राओं ने अंतिम वर्ष के 7 वें सेमेस्टर में प्रवेश किया है। कृषि संकाय में एक सप्ताह का ऑनलाइन ओरिएंटेशन प्रोग्राम चलाया जा रहा है। इसके माध्यम से शस्य, कीट, पौधा रोग, मृदा विज्ञान, उद्यान तथा कृषि प्रसार शिक्षा विभागों के शिक्षक छात्रों को ग्रामीण कृषि कार्यानुभव पाठ्यक्रम विषयों के बारे में प्रशिक्षित कर रहे है।

डीन एग्रीकल्चर डॉ एमएस यादव बताते है कि विश्वविद्यालय के कृषि संकाय के अधीन कांके (रांची), गोड्डा, देवघर एवं गढ़वा में चार कृषि कॉलेज कार्यरत हैं। इनमें रांची में 71 और तीन नये कॉलेजों में 50-50  छात्र–छात्राएं अध्ययनरत हैं। 7वें और 8वें सेमेस्टर में छात्रों को रेडी प्रोग्राम में फील्ड एक्सपीरियेंस हासिल करना है। छात्रों ने सेमेस्टर आधारित कोर्स में तीन वर्षो तक क्लास रूम टीचिंग से कृषि शिक्षा हासिल की।

देश में एकसमान लागू आईसीएआर की कृषि शिक्षा मॉडल के अधीन अंतिम वर्ष के दो सेमेस्टर में रेडी (READY) प्रोग्राम में छात्रों भाग लेना अनिवार्य है। इंटर्नशिप के समान इस प्रोग्राम में छात्रों को ग्रामीण कृषि कार्यानुभव, इन प्लांट ट्रेनिंग, एक्स्पेरिंसियल लर्निंग ट्रेनिंग एवं प्रोजेक्ट रिपोर्ट निर्माण की गतिविधियों में शामिल होना है।

रूरल एग्रीकल्चरल वर्क एक्सपीरियंस (RAWE) से छात्रों को ग्रामीण परिस्थितियों में किसानों द्वारा अपनाई गई कृषि प्रौद्योगिकियों एवं उनकी समस्यायों को समझने का मौका मिलता हैं। छात्रों को किसानों से कृषि तकनीकी ज्ञान एवं किसानों की समस्यायों का समाधान की सीख मिलती है। छात्रों को कृषि से जुड़े परिवारों के साथ ग्रामीण क्षेत्र में कार्य द्वारा कौशल एवं दृष्टिकोण विकसित करने में मदद मिलती है।

डॉ यादव बताते है कि लॉक डाउन की वजह से इस वर्ष छात्रों को निकटतम ग्रामीण परिवेश में ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव में भाग लेने का निर्देश दिया गया है। छात्रों को कृषि मित्र,पंचायत सेवक, पंचायत मुखिया, प्रखंड तकनीकी प्रबंधक आदि के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों से अनुभव बांटना है। छात्र स्वयं या समूह में गांवों में जाकर स्थानीय भूमि की स्थिति, जलवायु, कृषि परिस्थिति, सिंचाई साधन, खेती प्रणाली, फसल प्रभेद, फसलों में कीट व रोग, शस्य प्रबंधन, खेत की जुताई से कटाई तक का प्रबंधन, भंडारण, लाभकारी कृषि व्यवसाय जैसे पशुपालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन, सूकर पालन, मछली पालन, मधुमक्‍खी पालन व मशरूम उत्पादन आदि, प्रसंस्करण व मूल्यवर्धन, कृषि बाजार प्रणाली, कृषि योजनाओं आदि का किसानों से बातचीत के आधार पर ब्यौरा तैयार करेंगे।

कम लागत, बिना लागत एवं स्थानीय देशज तकनीकों को चिन्हित करना है। प्रत्येक दिन के ब्यौरे का प्रतिदिन प्रतिवेदन समन्यवयक को भेजेंगे। छात्रों का यह ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव कार्यक्रम 20 क्रेडिट का एवं छह महीनों का होगा। अंत में सभी छात्र ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव का विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।

कार्यक्रम के समन्वयक डॉ निभा बाड़ा होंगी। डॉ निभा ने जानकारी दी कि कार्यक्रम से छात्रों को स्वतंत्र कार्य करने, नेतृत्व एवं विश्लेषणात्मक कौशल व क्षमता का विकास, टीम के रूप में कार्य तथा कार्य योजना की संकल्पना तथा रिपोर्ट लेखन कौशल को बढ़ावा मिलेगा। डॉ बीके झा और डॉ नेहा पांडेय को रांची, सुश्री अभिलाषा मिंज को गढ़वा, डॉ नीरज कुमार को गोड्डा और डॉ सर्वेश कुमार को देवघर स्थित एग्रीकल्चर कॉलेज का रावे प्रोग्राम प्रभारी बनाया गया है।

बिरसा जयंती समारोह का आयोजन कल

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा 12 नवंबर को बिरसा जयंती समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर शोभा यात्रा, प्रदर्शनी, भगवान बिरसा मुंडा की जीवनी पर व्याख्यान का कार्यक्रम होगा। मौके पर भगवान बिरसा मुंडा के वंशज करीब 21 पारिवारिक सदस्यों को सम्मानित किया जायेगा। मुख्य कार्यक्रम प्रातः 10 बजे से कृषि संकाय सभागार में होगा। कार्यक्रम का आयोजन प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा किया जा रहा है। समारोह के मुख्य अतिथि कुलपति डॉ ओंकार नाथ सिंह होंगे। कुलसचिव डॉ नरेंद्र कुदादा ने बताया कि रविवारीय अवकाश और दीपावली पर्व के कारण विश्वविद्यालय के द्वारा 12 नवंबर को बिरसा जयंती समारोह का आयोजन किया जा रहा है।

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