उलिहातु के किसानों के बीच बीएयू ने सरसों बीज का किया वितरण

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  • कृषक–वैज्ञानिक अंतरमिलन कार्यक्रम आयोजित

दैनिक झारखंड न्‍यूज

रांची ।  बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय की ओर से खूंटी जिले के उलिहातु गांव में 7 नवंबर को कृषक–वैज्ञानिक अंतरमिलन का आयोजन किया गया। मौके पर डायरेक्टर एक्सटेंशन एजुकेशन डॉ जगरनाथ उरांव ने गांव के किसानों के विकास के लिए विश्वविद्यालय द्वारा रबी मौसम में चलाये जाने वाले प्रसार गतिविधियों की जानकारी दी। किसानों से कृषि तकनीकों को अपनाने में आ रही समस्या और स्थानीय विशेष आधारित खेती की जानकारी ली। गांव के आदिवासी किसानों के बीच तेलहनी फसल की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरसों की उन्नत किस्म एनआरसीएचबी-101 के बीजों का वितरण किया।

मौके पर मौजूद भगवान बिरसा मुंडा के पोते सुखराम मुंडा ने वैज्ञानिकों को स्थानीय आदिवासी किसानों की समस्याएं बताई। इस अवसर पर शस्य वैज्ञानिक डॉ आरपी मांझी ने किसानों को रबी फसलों में सरसों, चना, गेहूं और आलु की उन्नत प्रभेद, बीजोपचार, रोग एवं कीट नियंत्रण की जानकारी दी। मृदा वैज्ञानिक डॉ सुधीर झा ने टिकाऊ खेती के लिए मृदा स्वास्थ्य की देखभाल, मिट्टी के नमूने लेने की विधि व मिट्टी जांच का महत्त्व से किसानों को अवगत कराया। उद्यान वैज्ञानिक डॉ संयत मिश्रा ने किसानों को सब्जी एवं फलों के उन्नत किस्में, नर्सरी की तैयारी, बिचडो का उपचार और रोग एवं कीट प्रबंधन के बारे में बताया।

इस अवसर पर पशु चिकित्सा वैज्ञानिक डॉ बधनु उरांव ने बेहतर आजीविका के लिए ग्रामीणों को उन्नत नस्ल और वैज्ञानिक प्रबंधन से पशुपालन से जुड़ने की जानकारी दी। मौसम के मुताबिक पशुओं में टीकाकरण का महत्‍व और बीमारी से बचाव के उपायों को बताया। पशु चिकित्सा वैज्ञानिक डॉ पंकज सेठ ने मुर्गी पालन, सूकर पालन, बकरी पालन एवं बत्तख पालन में उन्नत नस्ल से लाभ, आवास एवं भोजन प्रबंधन की जानकारी दी। कार्यक्रम संचालन में डॉ पंकज सेठ एवं निर्मल कुमार ने सहयोग दिया।

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