बारह पड़हा सरना समिति ने आदिवासी जागरुकता मिलन समारोह का किया आयोजन

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दैनिक झारखंड न्‍यूज

रांची । जिले के कांके प्रखंड के मुरुम गांव में बारह पड़हा सरना समिति के तत्वावधान में आदिवासी जागरुकता मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता सधन उरांव ने की। समारोह को संबोधित करते सत्य सरना डहर के अध्यक्ष रघुनाथ उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज संस्कार का पालन, रक्षा, समाजिक और धार्मिक मजबूती से निभाने पर बल देता है। साथ ही, गरीब असहाय लोगों को शिक्षित कर समाज को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करना मुख्य उद्देश्‍य है।

कांग्रेसी नेता नीरज भोक्ता ने कहा कि आदिवासि‍यों की संस्कृति और सभ्यता पूरे विश्‍व में महान है। इसकी महानता इस बात से है कि वह जीवन जीने के तौर तरीके और समाज के प्रति अपने कर्तव्य निर्वाह्न की सीख देता है। संवैधानिक व्यवस्था के तहत आदिवसि‍यों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है। आदिवासी प्रकृति पूजक हैं। सरना स्थल पर पूजा पाठ करते हैं। इसलिए आदिवासी के नाम से जाति नहीं सरना के नाम से सरना धर्म कोड चाहिए।

शिक्षाविद डॉ करमा उरांव ने कहा कि हमारी पहचान प्रकृति है। हम प्रकृति में जीते हैं। आदिवासी ना इसाई बनना चाहते हैं और ना हिन्दू। इसलिए उन्हें अलग धर्म कोड चाहिए। बारह पड़हा सरना समिति के अध्यक्ष सधन उरांव ने कहा बहुप्रतिक्षित सरना धर्म कोड की मांग को लेकर सरकार द्वारा 15 नवंबर से पूर्व विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजने का निर्णय लिया है, जो स्वागतयोग्य है।

इसके अलावा आदिवासी उड़ान केंद्र के निदेशक सुरेंद्र लिंडा, कैलाश उरांव, महेश कुमार मनीष, बबुआ मुंडा, मुखिया एतवा उरांव, पच्चू उरांव, आशा उरांव, साधो उरांव, कैलाश उरांव, सुरेश उरांव, अनीता गाड़ी सहित कई लोगों ने संबोधित किया। समारोह में मदनपुर, हुसीर, रोल, एकम्बा, मुरुम, चौबे खटंगा, बुढमू, चान्हो, पोडै़याहाट, बालुमाथ, लातेहार से लोग शामिल हुए।

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