राज्य के विभिन्न केंद्रीय कारागार से 79 बंदियों को किया जाएगा रिहा

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  • मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य सजा पुनरीक्षण की बैठक की अध्यक्षता की

दैनिक झारखंड न्‍यूज

रांची । मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में राज्य सजा पुनरीक्षण की  बैठक मंत्रालय में 20 जुलाई को हुई। इसमें राज्य के केंद्रीय कारागार में आजीवन कारावास की सजा काट कुल 127 बन्दियों को कारामुक्त करने का प्रस्ताव रखा गया। इनमें से 79 बंदियों को रिहा करने पर सहमति बनी है। रांची से 50, हजारीबाग से 11, पलामू से 3, जमशेदपुर से 5 और दुमका केंद्रीय कारागार से 10 बंदियों को रिहा किया जायेगा। 40 बंदियों की रिहाई के प्रस्ताव को रद्द और आठ प्रस्ताव को विचाराधीन रखा गया है।

वृद्ध बंदियों के लिए कुछ करने की आवश्यकता

मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिया कि कारामुक्त हो रहे वृद्ध बंदियों खासकर महिला बंदियों का विशेष ध्यान रखें। उनके परिजनों से संपर्क कर परिजनों का काउंसिलिंग करने के पश्चात उन्हें सौंपे। साथ ही समय समय पर उनका हाल भी लें। यह भी सुनिश्चित करें कि ऐसे बंदी कारामुक्त होने के बाद दर-दर की ठोकरें ना खाएं। सरकारी योजना से भी उन्हें लाभान्वित करें। राशन कार्ड, वृद्धा पेंशन, आवास योजना समेत अन्य लाभ दें।

रिहाई में इन बातों का रखा गया ध्यान

बंदियों को रिहा करने के लिए बंदियों के अपराध की प्रकृति, आचरण, उम्र, कारा में व्यतीत वर्ष, उनकी आपराधिक मानसिकता (ताकि बाहर निकल कर पुनः अपराध न करे), बंदी के परिवार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का अवलोकन बारीकी से किया गया। जघन्य अपराध की श्रेणी में आने वाले बंदियों पर किसी तरह का विचार नहीं किया गया।

ये भी थे उपस्थित

बैठक में मुख्य सचिव अपर मुख्य सचिव गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग एल खियांग्ते, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का, पुलिस महानिदेशक एमवी राव, प्रधान सचिव सह विधि परामर्शी विधि विभाग प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, अध्यक्ष वाणिज्यकर ट्रिब्यूनल संजय प्रसाद, सहायक कारा महानिरीक्षक तुषार रंजन गुप्ता, विशेष कार्य पदाधिकारी दीपक विद्यार्थी व अन्य उपस्थित थे।

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