खुदरा यूरिया विक्रेताओं ने कालाबाजारी के लिए बड़े दुकानदारों को ठहराया दोषी

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  • कहा, घाटा सहकर नहीं कर सकते धंधा, सप्‍ताह भर में बात नहीं सुने जाने पर यूरिया बेचना कर देंगे बंद

दैनिक झारखंड न्‍यूज

रामगढ़ । जिले के तीन प्रखंडों के खुदरा यूरिया खाद विक्रेताओं की बैठक रविवार को महादेव मंडप परिसर में हुई। इसकी अध्यक्षता रचिया महतो ने की। इस दौरान दुकानदारों ने यूरिया में बड़े दुकानदारों की मनमानी पर चर्चा की। निर्णय लिया गया कि अगर उनकी बातों को अधिकारी नहीं सुनेंगे तो एक सप्ताह के बाद छोटे दुकानदार यूरिया नहीं बेचेंगे।

ये है दाम का गणित

दुकानदारों ने बताया कि यूरिया का 266 रुपया रैक पॉइंट पर खरीद पड़ती है। 266 रुपये यूरिया का एमआरपी है। रैक पॉइंट में उन्‍हें यह 290 से 300 रुपये में दिया जाता है। वहां से ट्रांसपोर्टिंग करने पर 30 रुपये भाड़ा और पांच रुपये लोडिंग एवं अनलोडिंग लगता है। इस तरह दुकान पहुंचने तक यूरिया की कीमत 370 से 380 रुपये पड़ती है। ऐसे में वे 400 रुपये प्रति बोरा बेचते है तो उन्‍हें सबसे बड़ा चोर बोला जाता है। बड़े-बड़े होलसेलर और डिस्ट्रीब्यूटर अपनी मनमानी से 266 की यूरिया की 300 से 310 रुपये तक कीमत ले रहे है। उसको देखने वाला कोई नहीं है।

मिलीभगत से कालाबाजारी

दुकानदारों ने कहा कि अधिकारियों की मिलीभगत से यूरिया की ब्लैक मार्केटिंग हो रही है। सभी दुकानदारों ने फैसला लिया है कि स्‍टॉक में मौजूद यूरिया को 270 रुपया में बेच देंगे। उसके बाद यूरिया बेचना बंद कर देंगे। लखन प्रसाद अग्रवाल ने कहा कि अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। जबरदस्ती दुकानदारों पर दबाब बनाकर 266 में बेचने के लिए बाध्य किया जा रहा है।

नुकसान उठाकर धंधा नहीं

दुकानदारों के मुताबिक रैक पॉइंट से उनको दुकान तक यूरिया को लाने में 370 से 380 रुपये का खर्च पड़ता है। ऐसे में नुकसान उठाकर धंधा नहीं कर सकते हैं। इसके मद्देनजर जब तक सरकार का कोई ठोस फैसला नहीं आ जाता है, तब तक दुकानों को बंद रखा जाएगा। मौके पर कृष्ण कुमार, सुरेश कुमार कश्यप, पवन अग्रवाल, अशोक कुमार, विक्की कुमार आदि मौजूद थे।

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