रक्षा बंधन विशेष : बीते 45 वर्षों से राखी बांधकर वृक्षों की कर रहे हैं रक्षा

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अरविंद अग्रवाल

पलामू । रक्षा बंधन भाई-बहन के प्‍यार का प्रतीक है। इस दिन भाई की कलाई पर बहन राखी बांधती है। भाई हर परिस्थिति में अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देता है। हालांकि झारखंड में एक शख्‍स ऐसा भी है, जो वृक्षों को राखी बांधकर उसकी रक्षा कर रहा है। यह काम वह बीते 45 वर्षों से कर रहा है। उसका नाम कौशल किशोर है।

पलामू के छतरपुर मुख्यालय स्थित कौशल नगर डाली गांव निवासी पर्यावरणविद कौशल किशोर ने वृक्षों पर राखी बांधने यानी वन राखी मूवमेंट की शुरुआत 1977 में थी। वह बताते हैं कि उनके द्वारा लगाये गये पौधों को वर्ष 1967 में वन माफियाओं द्वारा काटा जा रहा था। उसे कटने से बचाने के लिए 1977 में यह पर्यावरण धर्म चलाया। इसके तहत वृक्षों पर रक्षाबंधन यानी वन राखी मूवमेंट शुरू की।

श्री कौशल बताते हैं कि पौधारोपण का शुभारंभ उन्‍होंने वर्ष 1967 में अपनी जन्मभूमि झारखंड के पलामू जिले के छतरपुर प्रखंड के डाली बाजार गांव से की। शुरुआती दौर में अपनी निजी भूमि पर पौधरोपण किया। वर्ष 1966 में संपूर्ण देश महाआकाल की चपेट में आया। उस समय लोगों के पास ना तो खाने के अन्न थे और ना ही पीने को पानी। उस स्थिति का आकलन करते हुए उनके पिता मोहनलाल खुर्जा ने कहा था कि आकाल वनों की कटाई के कारण ही उत्‍पन्न हुआ है।

पिता की बातों से प्रभावित होकर श्री कौशल ने पेड़ लगाने और बचाने के अभियान की शुरुआत की, ताकि दोबारा लोगों को यह दुर्दिन देखने को नहीं देखना पड़े। जब उन्होंने पौधा लगाने की शुरुआत की, तब किसान अपनी भूमि पर पौधा लगाने से डरते थे। उन्हें डर था कि उनकी निजी जमीन पर लगे जंगल कहीं सरकार नहीं ले ले। फिर भी श्री कौशल ने अपने अभियान को बंद नहीं होने दिया। एक छोटे गांव से निकले अभियान ने आज दुनिया को पर्यावरण की रक्षा और पौधारोपण करने को प्रेरित कर दिया।

वर्तमान हालात को देखते हुए वन राखी मूवमेंट के अगुआ श्री कौशल का मानना है कि अभी आजादी की दूसरी लड़ाई बाकी है। प्रदूषण के कारण जिस रफ्तार से धरती का तापमान बढ़ रही है, वैसी हालात में 84 लाख योनि जीवों पर जल संकट के साथ-साथ ऑक्सीजन संकट भी होना तय है। इस भयावह स्थिति से बचने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण धर्म के आठ मूल मंत्रों को अपनाना होगा।

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