बिना लाइसेंस के चल रही फैक्‍ट्री, छापेमारी, कागजात दुरुस्त करने के लिए दिया 10 दिन का समय

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अरविंद अग्रवाल

पलामू । लाइसेंस के बिना फैक्ट्री चल रही है। एसडीएम के आदेश पर छापामारी हुई। कई कमियां मिली। इसके बाद भी उसे सील नहीं किया गया। उलटे कागजात दुरुस्त करने के लिए संचालक को 10 दिनों का समय दिया गया।

यह मामला छतरपुर थाना क्षेत्र का है। यहां के एनएच 98 मुख्य पथ पर स्थित नवृति फूड रैपर (कोडरमा) कंपनी के नाम पर मिक्चर बनाये जाने के मामले में जिला खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी ने 27 जून को छापेमारी की। इसमें भारी मात्रा में मिक्चर, मिक्चर बनाने वाली मशीन मिली। उक्त छापामारी में जिला फूड सेफ्टी ऑफिसर मनोज कुमार के अलावा छत्तरपुर थाना प्रभारी उपेंद्र सिंह, एसआई अशोक महतो दलबल के साथ शामिल थे। छापेमारी के खबर सुनकर फैक्टरी में कार्यरत वर्कर और मालिक को होश उड़ गए। इसमें किसी के भी गिरफ्तारी की सूचना नहीं है।

जिला फूड अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि सूचना मिली थी कि छत्तरपुर में नवृति कंपनी के नाम पर ब्रांड लगाकर मिक्चर बनाया जा रहा है। मामले में एसडीएम छत्तरपुर ने छापामारी करने का आदेश दिया। इसके तहत यह छापेमारी की गई। इस क्रम में भारी मात्रा में सैकड़ों बोरे में पैकिंग मिक्चर, मिक्चर बनाने की मशीन, पंचिंग करने की मशीन, भारी मात्रा में मिक्चर के खाली पैक, मिक्चर बनाने का कच्चा समान पाया गया। उन्होंने बताया कि पिछले 5 महीने से मैसर्स कंचन कुमारी (पति रंजीत कुमार गुप्ता) के नाम से मिक्सर और चाय की बिक्री लोकल मार्केट में की जा रही थी।

सेफ्टी ऑफिसर द्वारा कंचन कुमारी के नाम नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। इसमें कहा गया है कि दुकानदार द्वारा फूड लाइसेंस की मांग करने पर नहीं दिखाया गया। ना ही प्रॉपर्टी का एनओसी दिखाया गया। माक्स का प्रयोग भी नहीं हो रहा था। कोरोना काल में सरकार के निर्देश और कोरोना जैसी महामारी का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा था। इन सभी बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है। मजदूरों के साथ आम लोगों तक खाद्य सामग्री पहुंचाकर जीवन के साथ खिलवाड़ करने पर संचालक को नोटिस दिया गया है। नोटिस में वाटर टेस्टिंग रिपोर्ट और काम कर रहे कर्मियों का शौचालय नहीं होने, साफ सफाई नहीं रखने पर भी जवाब मांगा गया है। छापेमारी के दौरान खरीद-बिक्री की रिपोर्ट नहीं होने पर भी जवाब मांगा गया था। नोटिस में यह भी लिखा गया है 10 दिनों के अंदर सारे दस्तावेज तैयार कर ले, अन्यथा एफएसएस एक्ट के तहत संचालक के ऊपर कार्रवाई की जायेगी।

लोगों ने कहा कि फैक्ट्री को सील नहीं किया जाना और 10 दिन का समय देना मामले को संदेस्पद बनाता है। यह भी जांच का विषय है। क्या संचालक द्वारा तैयार खाद्य सामग्री की सप्लाई मार्केट में नहीं की जाएगी। आपको बता दें कि सरकार को लाखों का चुना लगाया जा चुका है। फिर भी नोटिस के अनुसार संचालक को 10 दिन का समय दिए जाने पर कई सवाल खड़े होते हैं।

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