आरटीआई में जुर्माने की राशि एक लाख रुपये करने की वकालत

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दैनिक झारखंड न्‍यूज

लोहरदगा । भारतीय सूचना अधिकार रक्षा मंच ने सूचना के अधिकार की जुर्माना राशि बढ़ाने की वकालत की। मंच ने सूचना आयोग में लंबे अर्से से रिक्‍त पड़े नौ आयुक्‍तों की नियुक्ति जल्‍द करने की मांग भी की। संगठन ने सदस्‍यता अभियान भी शुरू किया। राज्‍यभर में सदस्‍य बनाने की तैयारी है।

मंच के केंद्रीय अध्यक्ष रविकांत पासवान ने कहा कि सूचना आयुक्त के पद काफी दिनों से खाली हैं। इससे आम जनता को सूचना प्राप्त करने में परेशानी हो रही है। इसके बाद भी सरकार द्वारा सूचना आयुक्तों की बहाली करने में टाल-मटोल की नीति अपनायी जा रही है। सरकार सूचना आयोग में योग्य और दक्ष लोगों को जल्द सूचनायुक्त के पद पर बहाल करें।

श्री पासवान ने कहा कि सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत जान बूझकर सूचना देने में कोताही बरतने वाले जन सूचना पदाधिकारी को सूचना आयोग एक्ट की धारा – 20 (I) के तहत 25 हजार रुपये का जुर्माना कर आवेदक को सूचना से वंचित कर दिया जाता है। इससे लाखों-करोडों रुपये हजम करने वाले या बड़ी अनियमितता बरतने वाले जन सूचना पदाधिकारि‍यों के लिए यह सजा कम है। ऐसे लापरवाह अधिकारि‍यों को न्यूनतम एक लाख रुपये का जुर्माना का प्रावधान होना चाहिए। साथ ही, उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए।

श्री पासवान ने सूचना आयुक्तों की शीघ्र नियुक्ति और आरटीआई में दंड की राशि‍ बढाने की मांग की। साथ ही, भारतीय सूचना अधिकार रक्षा मंच के उदेश्य, नीति व सिद्धांत को पूरे झारखंड में फैलाने और सदस्यता अभियान चलाने पर जोर दिया। इस मामले में हुई चर्चा में मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष युसूफ अंसारी, केंद्रीय महासचिव आनंद किशोर पण्डा, लोहरदगा जिलाध्यक्ष शकील अख्तर, जिला सचिव रणजीत गिरि‍, संरक्षक प्रदीप राणा, संजय पाण्डेय, लाल अरविंद कुमार नाथ शाहदेव, बालमुकुंद लोहरा, आनंद कुमार सोनी, दि‍लीप नायक, कुलदीप लाल, सुमन साहु, पंकज भगत, अफरोज अंसारी, रामनंदन महली, एजाज अख्तर, नरेंद्र दसौंधी, सुनील कुमार, संजय पाण्डेय, मदन उरांव सहित कई आरटीआई और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे।

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