वित्त मंत्री के जिले में KCC का बुरा हाल, बैंक और अंचल में लंबित हैं किसानों के आवेदन

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  • उपायुक्त‍ की समीक्षा बैठक में खुलासा

आनंद कुमार सोनी

लोहरदगा । झारखंड के वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव के जिले में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) बनाने का बुरा हाल है। बैंक और अंचल के स्तर पर किसानों के आवेदन लंबित हैं। महज 18 फीसदी आवेदन ही स्वीकृ‍त हुए हैं। इसका खुलासा उपायुक्त दिलीप कुमार टोप्पो की अध्यक्षता में कृषि और इससे संबद्ध विभागों की समीक्षा बैठक में हुआ।

समीक्षा में ये बातें उभरी

केसीसी पर समीक्षा में पाया गया कि किसानों के 1844 आवेदन बैंक और 481 आवेदन अंचल स्तर पर लंबित हैं। उपायुक्त ने सभी अंचल अधिकारियों को निर्देशित कि‍या कि वे अंचल में लंबित केसीसी आवेदन का सत्यापन कर बैंकों को भेजें। अग्रणी बैंक प्रबंधक को भी निर्देशित किया गया कि विभिन्न बैंकों में लंबित केसीसी आवेदन का निष्पादन करायें। समीक्षा में पाया गया कि 1844 में मात्र 335 ही आवेदन स्वीकृत हैं। उपायुक्त ने कहा कि यदि कोई बैंक इसमें कोताही करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।

किसानों का समय महत्वपूर्ण

उपायुक्त ने कहा कि किसानों के लिए यह समय काफी महत्वपूर्ण है, जिसमें उन्हें राशि की आवश्यकता है। अगर किसान को केसीसी का लाभ मिल जाता है, तो वे कृषि कार्य के लिए बैंक से ऋण प्राप्त कर सकते हैं। कोई भी अंचल अधिकारी या बैंक इसमें बाधक नहीं बनें। उपायुक्त ने जिला गव्य विकास पदाधिकारी को भी पशुपालन कार्यों के लिए कृषकों को केसीसी दिलाने का आदेश दिया। साथ ही, झारखण्ड मिल्क फेडरेशन के प्रतिनिधि को आगामी बैठकों में भाग लेने के लिए संपर्क करने का निर्देश दिया, ताकि गव्य विकास से जुड़े कार्यों में प्रगति लायी जा सके।

ससमय बीज वितरण हो

कृषि विभाग की समीक्षा के क्रम में आत्मा की परियोजना उपनिदेशक ने बताया कि रबी फसल के लिए 2083 क्विंटल गेहूं की मांग के विरूद्ध अब तक 536 क्विंटल गेंहू के बीज की प्राप्ति लैम्पस में हो गई है। मसूर, सरसों आदि फसलों के बीज की भी प्राप्ति हो रही है। उपायुक्त द्वारा निर्देश दिया गया कि किसानों का चयन सही तरीके से हो और बीज का वितरण किया जाय। अनुदान पर दी जाने वाली बीज का भी वितरण ससमय कर लिया जाय। बीज वितरण में ध्यान दिया जाय कि अच्छी खेती करने वाले क्षेत्र के जरूरतमंद किसानों को ही बीज वितरण का लाभ मिले।

टीकाकरण का नियमित चले

जिला पशुपालन पदाधिकारी को आदेश दिया कि जिले में पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए नियमित टीकाकरण का कार्यक्रम चलाया जाय। पशुओं के मुंह और खुर रोग, लंगड़ा बुखार, गलघोंटू रोग, सूकरों के स्वाईन फीवर का इलाज समय से किया जाय। जिले में उच्च प्रजाति के पशुपालन को बढ़ावा दिया जाय, ताकि यहां के किसानों को पशुपालन से भी अच्छी आय हो सके। जिले में कुक्कुट पालकों को कड़कनाथ प्रजाति का कुक्कुट पालन करने के लिए प्रेरित करें, जिसका मांस व्यक्ति के कोलेस्ट्रॉल स्तर को सामान्य बनाये रखने में काफी बेहतर स्त्रोत है।

किसानों का निबंधन करायें

जिला सहकारिता पदाधिकारी को निर्देश दिया गया कि लैम्पस में लग रहे कैंप में अधिक से अधिक किसानों का निबंधन करायें, ताकि वे अपना धान लैम्पस के जरिये सरकार को 20.50 रूपये प्रति किलोग्राम की दर से बेच सकें। इससे वे बिचैलियों के हाथों अपना धान औने-पौने दाम पर बेचने से बच जायेंगे। उन्हें उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। सरकार किसानों के हित के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

यह निर्देश भी दिया गया

जिला उद्यान पदाधिकारी को मशरूम की खेती के लिए बेहतर और कृषि कार्यों में रूचि लेनेवाले लोगों का चयन बेहतर तरीके से करने का निर्देश दिया गया। जिला मत्स्य पदाधिकारी और सहायक भूमि संरक्षण पदाधिकारी को जिले में तालाब निर्माण के लिए बेहतर स्थानों का चयन करने का आदेश दिया। ध्यान रहे कि चयन योग्य व्यक्ति का ही हो।

बैठक में जिला सहकारिता पदाधिकारी जगमनी टोप्पो, जिला पशुपालन पदाधिकारी तपेश्वर प्रसाद साहु, जिला गव्य विकास पदाधिकारी त्रिदेव मंडल, जिला मत्स्य पदाधिकारी कमरुज्ज्मां, जिला उद्यान पदाधिकारी एमलेन पूर्ति, सहायक भूमि संरक्षण पदाधिकारी विनय, आत्मा की परियोजना उप निदेशक तृप्ति तिर्की व अन्य उपस्थित थे।

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