भगवान भरोसे ठीक हो रहे हैं जिले में संचालित क्‍वारंटीन सेंटर में रखे गये लोग

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  • इम्‍यूनिटी बढ़ाने के लिहाज से नहीं मिलता खुराक
  • मरीजों की सैंपल जांच में किया जा रहा है भेदभाव

दै‍न‍िक झारखंड न्‍यूज

लोहरदगा । जिले में संचालित क्‍वारंटाइन सेंटरों में लोग भगवान भरोसे ही ठीक हो रहे हैं। क्‍वारंटीन किये गये लोगों की कोरोना रिपोर्ट पैरवी पर मिल रही है। इम्‍यूनिटी पावर बढ़ाने का कोई इंतजाम नहीं है। साफ-सफाई का भी ख्‍याल नहीं रखा जा रहा है। खास के लिए शौचालयों को र‍िजर्व रखा जाता है। क्‍वारंटीन सेंटर में रहकर आये लोगों ने ये हाल बयां किया है।

क्‍वारंटीन सेंटरों से रहकर घर लौटे लोगों का कहना है कि मरीजों की जांच में भी भेदभाव किया जा रहा है। हॉस्पिटल कर्मी सहित अन्य परिचित परिवार की रिपोर्ट तीन दिनों में ही मंगाकर सेंटर से रातो रात छुट्टी दे दी जाती है। पहले से रह रहे लोगों का सैंपल आठ दस दिनों बाद लिया जाता है।

क्‍वारंटीन सेंटर में रह कर आये मरीजों ने बताया कि उन्‍हें कस्‍तूरबा विद्यालय स्थित सेंटर में 20 जुलाई को भर्ती किया गया। विद्यालय के स्टॉफ के परिजन, सदर अस्पताल के स्टाफ और अन्य एक परिवार के तीन सदस्यों को 25-26 जुलाई को भर्ती कि‍या गया। इनका सैंपल 18-19 लोगों के बाद लिया गया। उनकी रिपोर्ट 29-30 जुलाई को आ गई। निगेटिव रिपोर्ट आने पर उन्हें छुट्टी दे दी गयी। अन्‍य लोगों को रिपोर्ट की सूचना तक नहीं दी गयी। उनकी रिपोर्ट 3 अगस्‍त को आई, जो निगेटिव निकली। हालांकि उनके पति की रिपोर्ट पॉजिटिव आयी।

घर लौटी पीड़ि‍ता ने बताया कि क्‍वारंटीन सेंटर में एक ही कमरे में पति के अलावे तीन-चार अन्य परिवार को रखा गया था। खाना-पानी लेने के क्रम में भी एक दूसरे के करीब हुए। दूरी का पालन भी नहीं हो पाता था। उन्होंने बताया 15 दिनों से उनका 4 साल का बच्चा घर में बिना मां-बाप का पड़ा था। छुट्टी मिलने के बाद घर आने पर बच्चा मुझे देखकर रोता हुआ फफक कर चिलाने लगा।

सेंटर में रह रहे मरीजों का कहना है कि‍ यहां इन्‍यूनिटी बढ़ाने के दृष्टिकोण से खाने-पीने का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हालांक‍ि दोनों टाइम भात, एक सब्जी और पानी जैसा दाल दिया जा रहा है। नाश्‍ता में एक अंडा या पाव, डिस्पोजल गिलास से आधा गिलास दूध दिया जाता है। लगातार एक ही प्रकार का खाना म‍िलने से सभी का जी ऊब जाता है। इम्‍यूनिटी पावर बढ़ाने के हिसाब से कुछ नहीं दिया जा रहा है। बहुत जिद करने पर किसी-किसी को रोटी मिल पाती है। अधिक लोग होने के बाद भी कुछ शौचालय में ताला लगा रहता है। खास के आने पर उसके लिए उसे खोला जाता है।

सेंटर पर एक ही परिवार के दर्जन भर लोगों को रखा गया है। इसमें बूढ़े से लेकर बच्‍चे तक शामिल हैं। वृद्ध व्‍यक्ति की तबियत बहुत खराब थी। वे मल-मूत्र तक का त्‍याग भी बेड पर कर रहे थे। उनके साथ कई बच्‍चों की रिपोर्ट भी निगेटिव आई। परिवार के विरोध के बाद भी उन्‍हें जबरन घर भेज दिया गया। एक महिला की रिपोर्ट निगेटिव और पति की पॉजिटिव आई। पति की तब‍ियत काफी खराब है, उसकी सेवा में पत्नी लगी रही है। अब जबरदस्ती पति को छुटी दे दी गयी और पत्‍नी सेंटर में रह गई है। यही नहीं, सेंटर लाये गये कई लोग मधुमेह से पीड़ि‍त हैं। इसके बाद भी उन्‍हें भोजन में लगातार चावल और आलू की सब्‍जी दी जा रही है।

सेंटर से छुट्टी पाकर घर लौटे लोगों का आरोप है क‍ि साज‍िश के तहत कोवि‍ड सेंटर से वृद्ध, बीमार और बच्‍चों की र‍िपोर्ट न‍िगेट‍िव बताकर प्रशासन छुट्टी दे दे रहा है। स्‍वास्‍थ्‍य लोगों को पॉज‍िट‍िव बताकर सेंटर में रखा जा रहा है। दरअसल सेंटर में क‍िसी की मौत होने पर प्रशासन की बदमानी होती है। घर में मौत होने पर उसे बीमारी बताकर वह पल्‍ला झाड़ा जा सकता है।

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