वैश्विक महामारी रोकने के लिए अलग से अध्यादेश की नहीं है जरूरत : अयुब खान

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दैनिक झारखंड न्‍यूज

लातेहार । माकपा के पूर्व जिला सचिव सह चतरा लोकसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी अयुब खान ने कहा है कि कोरोना के संक्रमण से निपटने के लिए झारखंड जैसे गरीब प्रदेश में एक लाख रूपया का जुर्माना और दो साल की सजा के अध्यादेश की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए पहले से ही जुर्माना और जेल का प्रावधान है। इसलिए इसपर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तुरंत विचार करें। वैश्विक महामारी की रोकथाम के लिए एहतियात जरूरी है। सरकार के निर्देश का पालन भी लोग कर रहे हैं। पुलिस की गश्‍ती और छापामारी भर से ही भीड़-भाड़ नहीं लगती है। लोग बिना मास्क के नहीं चलते हैं। इसके बावजूद भी इतनी सख्त सजा का प्रावधान का खामियाजा गरीब आम लोगों को ही भुगतना पड़ेगा। इस प्रावधान का दुरुपयोग भी होगा, क्योंकि इसे लागू करने में पुलिस स्वतंत्र होगी। पुलिसिया भूमिका पर किसी का नियंत्रण नहीं रहेगा।

कोरोना के कारण लॉकडाउन से आम जनता बुरी तरह प्रभावित और परेशान हैं। खाने के लिए लाले पड़े हैं। ऐसे समय पर यह अध्यादेश लोगों की परेशानी बढ़ाएगी। गरीबों के बीच नि:शुल्क मास्क वितरण और सार्वजनिक स्थलों पर सैनि‍टाइजर की व्यवस्था किए जाने की जरूरत है। मुख्यमंत्री द्वारा हमेशा गलत नियमों और कानूनों का विरोध किया जाता रहा है। इसलिए राज्य की जनता को उम्मीद है कि वे इस मामले पर लचीला रवैया अपनायेंगे। इस फैसले पर पुनर्विचार कर इस सख्त अध्यादेश को वापस लेने की मांग माकपा ने मुख्यमंत्री से की है।

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