टाटा स्टील फाउंडेशन ने मनाया विश्व आदिवासी दिवस, समुदाय की जीवटता के नवोन्वेषी तरीकों पर चर्चा

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दैनिक झारखंड न्‍यूज

जमशेदपुर । विश्‍व आदिवासी दिवस पर विशेषज्ञों ने एक मंच पर आकर कोविड-19 महामारी से निपटने में आदिवासी समुदाय द्वारा प्रदर्शित शक्ति और उनकी जीवटता के नवोन्वेषी तरीकों पर चर्चा की। टाटा स्टील फाउंडेशन ने वेबिनार की मेजबानी की। इसमें समाजशास्त्री और लेखिका डॉ मीनाक्षी मुंडा और चाईबासा हो महासभा के उपाध्यक्ष नरेश देवगम पैनलिस्ट के रूप में शामिल हुए। उन्होंने आदिवासियों के अच्छे अभ्यासों के साथ-साथ उनके पारंपरिक ज्ञान और प्रथाओं का संरक्षण एवं संवर्धन कर इस महामारी के दौरान इसका आगे अधिक से अधिक लाभ उठाने पर अपने विचार साझा किए।

श्री देवगम ने कहा कि आदिवासी संस्कृतियों में जब कोई हमारे घर में प्रवेश करता है, तब हम हल्दी के पानी से लोगों का हाथ धोते हैं, क्योंकि यह एक एंटीसेप्टिक की तरह काम करता है। इन जैसी प्रथाओं ने हमारे घरों को सुरक्षित रखा है। ऐसी संस्कृतियों की प्रासंगिकता आज भी उतनी ही है।

डॉ मुंडा ने बताया कि आदिवासी समुदायों में बहुत-सी प्रथाएं मौजूद हैं, जिन्हें दुनिया नहीं जानती है। दिलचस्प बात यह है कि दुनिया की सबसे पुरानी और वैज्ञानिक प्रथाएं उनके साथ हैं। कई आदिवासी समुदायों ने साल की पत्तियों के मास्क बनाए हैं। कई ने अपने गांवों को बंद कर दिया है। वे सामाजिक दूरी को बेहतर तरीके से समझते हैं, क्योंकि उनके समुदायों में किसी स्वास्थ्य संकट उत्पन्न होने पर खुद को बंद करने की प्रथा रही है।

प्रख्यात लोक गायक और पद्मश्री से सम्मानित मुकुंद नायक ने रिद्म्स ऑफ अर्थ से लिया गया पहला सिंगल ‘विश्वास’ के लांच के उपलक्ष्य पर एक वीडियो संदेश के माध्यम से अपनी शुभकामनाएं दी। ‘रिद्म्स ऑफ अर्थ’ पूरे भारत में आदिवासी संगीत का एक संग्रह है, जिसे हमने तैयार किया है। यह संगीतमय उत्सव देश के आदिवासी समुदायों से अद्भुत महिलाओं, पुरुषों और बच्चों के जीवन का एक तरीका है, जो हमारी धरती और उसके लोगों से कभी अलग नहीं हुआ है। दुनिया के आदिवासियों से जो हमने सीखा है, उन सभी का आनंद प्रदान करता हैं।

टाटा स्‍टील के सीएसआर चीफ सौरव राय ने कहा कि आदिवासी समुदायों को अपनी पारंपरिक पहचान में सतत आस्था है, सद्भाव, जो प्रकृति हमें सिखाती है, उस पर अटूट विश्वास है। उनके पास वह विश्वास है, जिसकी जरूरत मनुष्य को पर्यावरण और समुदाय पर पड़नेवाले प्रभावों को संतुलित करने में होती है। यह गीत उनके जीवन जीने के समृद्ध तरीके से सीखने की हमारी इच्छा और हमारे आत्मविश्वास की पुष्टि करता है। विभिन्न वर्गों के दर्शकों ने इस वेबिनार में हिस्सा लिया और पैनलिस्टों के साथ बातचीत की।

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