स्‍थापना के 99 साल पूरे किये शावक नानावटी टेक्नीकल इंस्टीट्यूट ने

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दैनिक झारखंड न्‍यूज

जमशेदपुर । टाटा स्टील की स्थापना 1907 में हुई थी। प्लांट के उपकरणों को चलाने के लिए विदेशी तकनीशियनों की आवश्यकता होती थी, क्योंकि देश में तब ऐसा कोई संस्थान नहीं था, जहां भारतीय धातु विज्ञान या स्टील निर्माण का ठोस ज्ञान प्राप्त किया जा सके। 1916 में विस्तारीकरण और विविधीकरण के दौरान टाटा स्टील ने कुशल श्रमशक्ति की कमी महसूस की। कुशल कर्मियों की इस बढ़ती मांग को पूरा करने और आत्मनिर्भर होने के लिए बीजे बादशाह ने साकची में तकनीकी संस्थान स्थापित करने की एक व्यापक योजना बनाई। 1 नवंबर, 1921 को कंपनी द्वारा जमशेदपुर टेक्नीकल इंस्टीट्यूट (जेटीआई) के रूप में एक अग्रणी तकनीकी प्रशिक्षण पहल की गई। इन वर्षों में संस्थान ने मेंटेनेंस के क्षेत्र में प्रशिक्षण प्रदान करने वाली एक संस्था से परिचालन प्रशिक्षण केंद्र (ऑपरेशनल ट्रेनिंग सेंटर) के रूप में क्रमिक विकास किया है।

नई मांगों को पूरा करने के लिए विकास

टाटा स्टील वर्क्स में सुपरवाइजरी पदों को लेकर कर्मियों को प्रशिक्षित करने के लिए एक सीनियर अप्रेंटिसशिप स्कीम के साथ जेआईटी की शुरुआत की गयी थी। 1930 तक भारत में तीव्र औद्योगिक व प्रौद्योगिकी विकास के कारण संस्थान द्वारा किए गए कार्यों की समीक्षा की जरूरत महसूस की गयी। टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी के निदेशक मंडल ने 18 जुलाई, 1930 को एक तकनीकी शिक्षा सलाहकार समिति (टीईएसी) की स्थापना की और इस समिति की सिफारिशों के आधार पर, ए1, ए2 और बी क्लास अप्रेंटिसशिप स्कीम  का उद्घाटन किया गया।

पाठ्यक्रम का विस्तार हुआ

जैसे-जैसे संस्थान बड़ा हुआ, मौजूदा पाठ्यक्रम में वैल्यू एडीशन की आवश्यकता महसूस की गई। ‘ए2 क्लास स्कीम’ विदेशों में अनुभव के साथ धातु विज्ञान, इंजीनियरिंग या विज्ञान में ऑनर्स या प्रथम श्रेणी के डिग्रीधारकों के लिए थी। ‘ए1 क्लास स्कीम’ किसी भारतीय या विदेशी विश्वविद्यालय से उपर्युक्त समान योग्यता, लेकिन बिना अनुभव वाले स्नातकों के लिए थी।

‘बी क्लास स्कीम’ धातु विज्ञान, इंजीनियरिंग या विज्ञान के सामान्य डिग्री धारकों के लिए थी। 1930 में 18 साल से कम उम्र के लड़कों के लिए मिडिल-इंगलिश स्टैंडर्ड की न्यूनतम योग्यता के साथ कुशल कार्यों के लिए ‘सी क्लास अप्रेंटिसशिप स्कीम’ आरंभ की गई। उन्हें कुशल आर्टीसन के रूप में अर्हता प्राप्त करने के लिए पांच वर्षीय थ्योरीटिकल और प्रैक्टिकल प्रशिक्षण दिया गया।

तैयार जमशेदपुर टेक्नीकल इंस्टीट्यूट

जमशेदपुर टेक्निकल इंस्टीट्यूट (जेटीआई) ने 1955 में टाटा स्टील की दो मिलियन टन विस्तार परियोजना के लिए कंपनी की बदलती आवश्यकता को पूरा करने हेतू नए कार्यक्रमों की शुरुआत की। टाटा स्टील के पास अपने ऑपरेशनल व मेंटेनेंस क्षेत्रों के लिए  अच्छी तरह से प्रशिक्षित लोग थे और इसलिए, जेटीआई में प्रशिक्षण प्रणाली को तद्नुसार उपयुक्त तरीके से रूपांतरित किया गया। 1954 में रिफ्रैक्ट्री मैसन को प्रशिक्षित करने के लिए दो साल का स्कीम शुरू किया गया। तकनीकी कर्मियों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए 1960 में स्टील वर्क्स के अंदर परिचालन क्षेत्रों में कुशल कार्यों के लिए विज्ञान स्नातकों को प्रशिक्षित करने की एक नई योजना शुरू की गई।

सतत विकास के लिए प्रतिबद्ध

1967 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा धारकों को प्रशिक्षित करने के लिए ’जूनियर सुपरवाइजरी ट्रेनिंग स्कीम’ नामक एक योजना की घोषणा की गई। 1961 के अप्रेंटिस एक्ट  की शुरुआत के साथ स्टील कंपनी में आर्टीसन ट्रेनिंग स्कीम को ट्रेड अप्रेंटिस स्कीम में बदल दिया गया। 1969 में ऑपरेटिव ट्रेनिंग स्कीम के स्थान पर टेक्नीकल प्रोबेशनर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम लाया गया।

वैश्विक सहयोग के ल‍िए करार

दिसंबर 1989 में, टाटा स्टील के टेक्नीकल ट्रेनिंग डिवीजन ने नीदरलैंड्स में हुगोवेंस स्टील प्लांट की एक इकाई ‘हुगोवेंस टेक्निकल सर्विसेस’ के साथ मिल कर पांच साल के सहयोग के लिए करार किया।

इस सहयोग का उद्देश्य ट्रेनिंग डिवीजन के अंदर प्रशिक्षण सुविधाओं का उन्नयन करना और साथ-ही-साथ, प्रशिक्षकों की समग्र दक्षता में सुधार करना था। इस पंच-वर्षीय सहयोग ने टाटा स्टील को अपने प्रशिक्षण और ढांचागत सुविधाओं को और बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभायी। इसके परिणामस्वरूप, नीदरलैंड्स में मिले प्रशिक्षण से जेआईटी के प्रशिक्षकों को वैल्यू एडीशन का लाभ प्राप्त हुआ। अन्य प्रत्यक्ष लाभों में, आधुनिक ट्रेनिंग सॉफ्टवेयर और कोर्सवेयर में वृद्धि शामिल है। इसके फलस्वरूप, कंपनी शॉप फ्लोर में अनुभवी और जानकार मेंटरों का ज्ञान और कौशल ऑपरेटरों को स्थानांतरित करने में सक्षम बनी। इस सहयोग ने एडवांस्ड ट्रेनिंग सेंटर में एक जगह पर नए प्रशिक्षण सुविधाओं के निर्माण को सक्षम किया, जो प्रशिक्षुओं को अत्याधुनिक प्रशिक्षण उपकरण और सिमुलेटर प्रदान करते हैं। इन्हें 3 मार्च, 1995 को कार्यकारी किया गया था।

इंस्टीट्यूट का नाम बदल

1992 में शावक नानावटी की स्मृति में जमशेदपुर टेक्निकल इंस्टीट्यूट का नाम बदल कर शावक नानावटी टेक्नीकल इंस्टीट्यूट रखा गया, जो इसके पहले ग्रेजुएट ट्रेनी थे। बाद में टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक बने। 1993 में प्रोसेस ऑपरेशंस में प्रशिक्षण शुरू किया गया। प्रोसेस ऑपरेशंस ट्रेनीज के पहले बैच के लिए दाखिला लिया गया। मानक प्रशिक्षण परिणाम और बेहतर गुणवत्ता के लिए कौशल के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक प्रशिक्षण दस्तावेजों का सृजन किया गया। इसने आउटगोइंग ट्रेड अप्रेंटिस की गुणवत्ता को बढ़ाने में बहुत मदद की, जिसने उस साल आयोजित सातवें वर्क्स स्किल इंडिया कंपीटिशन (पूर्वी क्षेत्र) में दस पदक हासिल किए। इसी वर्ष उषा मार्टिन लिमिटेड ने अपनी तकनीकी प्रशिक्षण प्रणाली को उन्नत करने के लिए एसएनटीआई के साथ सहयोग का करार किया। जनवरी 1997 में आईएसओ-9001:1994 की आवश्यकताओं के अनुसार, आईआरक्यूएस द्वारा संस्थान का मूल्यांकन किया गया। प्रमाणीकरण के लिए इसकी सिफारिश की गई। यह मानक प्राप्त करने वाला यह भारत का पहला इन-हाउस तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र है।

एक प्रीमियर कॉर्पोरेट तकनीकी संस्थान

शावक नानावटी टेक्नीकल इंस्टीट्यूट (एसएनटीआई) ने कंपनी की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए 1999 में क्लस्टर मैनिंग ट्रेनिंग की शुरुआत की। 2003 में यह संस्थान  इलेक्ट्रॉनिक्स, मेक्ट्रोनिक्स, टूल ऐंड डाई मेकिंग और कंप्यूटर शाखाओं में डिप्लोमा स्तर के कार्यक्रम चलाने के लिए तैयार था। 2006 में यहां ठेकेदार के कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण देना आरंभ किया गया। 2008 में एसएनटीआई ने तकनीकी प्रदर्शनी शुरू की। 2010 में, एनआईटी जमशेदपुर के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया और मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और मेटलर्जीकल इंजीनियरिंग के लिए सर्टीफिकेट कोर्स आरंभ किया गया। 2011 में केंद्रीय श्रम व रोजगार मंत्रालय के रोजगार व प्रशिक्षण महानिदेशालय ने एसएनटीआई को अप्रेंटिस की 86वीं क्षेत्रीय प्रतियोगिता में ‘पूर्वी क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रतिष्ठान’ घोषित किया।

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