टाटा स्टील फाउंडेशन की पहल से बढ़ रही नोआमुंडी के किसानों की आय

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दैनिक झारखंड न्‍यूज

जमशेदपुर । झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित नोआमुंडी में टाटा स्टील फाउंडेशन नोआमुंडी और आसपास के गांवों के किसानों के लिए कई प्रकार की आजीविका पहल कर रहा है। इन पहलों में एसआरआई (श्री विधि), आम बागान का निर्माण, मशरूम की खेती, तिलहन की खेती, पपीता व केला बागान का निर्माण, उच्च घनत्व वाले मिश्रित बाग कृषि, बत्तख पालन और कई अन्य शामिल हैं। इन्हें किसानों की कृषि उपज को बढ़ाने के लिए उनकी जरूरत के अनुसार अनुकूलित किए गए हैं। पिछले पांच वर्षों में 1,450 से अधिक किसानों ने इस तरह की पहल के माध्यम से लाभ उठाया है। अपने परिवारों का भरण-पोषण करने के लिए स्थिर आय का सृजन करने में सक्षम हुए हैं।

हाल ही में, नोआमुंडी में कृषि भूमि का गहन शोध करने के बाद टाटा स्टील फाउंडेशन ने छोटे और सीमांत किसानों की मदद करने के लिए 12 महीने की सिंचाई क्षमता वाले हॉर्टीकल्चर मॉडल के निर्माण पर जोर देना शुरू कर दिया है। 8 विभिन्न प्रकार के फलों के साथ उच्च घनत्व वाले मिश्रित बाग के रूप में जानी जाने वाली यह परियोजना इन किसानों को प्रति हेक्टेयर 1 लाख से अधिक आय प्रदान करने के उद्देश्य से आगे बढ़ायी गयी है। ऐसे ही लाभार्थियों में से एक कुटिंगटा गांव की पूर्व मुखिया यशमती तिरिया कहती हैं कि वर्तमान में मैं अपने बगीचे में पपीता और अनार जैसे खास और उच्च आय वाले आठ प्रकार के फलों की खेती कर रही हूं। हमने अधिकतम उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए खेती के वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग किया है। यहां इस प्रकार की खेती पहले कभी नहीं की गई है।

उच्च मूल्य के अंगूर बेल की खेती के लिए ट्रेलिस का उपयोग करने से भी 15 से अधिक सीमांत किसानों को अपनी वार्षिक आय बढ़ाने में मदद मिली है। रेंगरबेड़ा गांव के संजीत बोबोंगा और उइसिया गांव के गणेश केराई एक साल में ट्रेलिस-आधारित खेती की मदद से प्रति वर्ष 50 हजार रुपये की अतिरिक्त आय सृजन करने में सक्षम हुए हैं। इसके अलावा, एसआरआई (सिस्टम ऑफ राइस इंटेसीफिकेशन) विधि पर 101 से अधिक किसानों को प्रशिक्षित किया गया है। 502 से अधिक किसानों को अपनी आय बढ़ाने के लिए किचन गार्डेन स्थापित करने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान की गई है।

उत्पादकता और फसल की पैदावार में सुधार, शुष्क भूमि की खेती और सिंचाई सुविधाओं में वृद्धि,  बंजर भूमि का विकास और कृषि तकनीकों में कौशल-आधारित प्रशिक्षणों के माध्यम से समुदाय की क्षमता बढ़ाना इन आजीविका पहलकदमियों के प्रमुख उद्देश्य रहे हैं। नोआमुंडी में किसानों के लिए एक सस्टेनेबल आजीविका के निर्माण के लिए इस तरह के हस्तक्षेप के कारण कई स्थानीय लोगों में अपने परिवार का भरण-पोषण के लिए आय के प्राथमिक स्रोत के रूप में कृषि के प्रति मजबूत विश्वास पैदा हुआ है।

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