सस्टेनेबल माइनिंग के प्रति Tata Steel की प्रतिबद्धता को दर्शाता है जैव विविधता संरक्षण

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दैनिक झारखंड न्‍यूज

जमशेदपुर । झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित नोआमुंडी में विविध वनस्पतियों और जीवों का खजाना है। यह भिन्न-भिन्न प्रजातियों के सरीसृपों और पक्षियों की कई अनोखी प्रजातियों का एक प्राकृतिक आवास है। पिछली एक शताब्दी में नोआमुंडी में स्थित टाटा स्टील का आयरन ओर माइंस ने सस्टेनेबल माइनिंग अभ्यायों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के साथ इस क्षेत्र में जैव विविधता को संरक्षित करने और बढ़ाने में अहम योगदान दिया है। विश्व जैव विविधता दिवस, वार्षिक पुष्प प्रदर्शनी, ‘स्नेक्स आर फ्रेंड्स’ प्रोग्राम और जैव-कला विविधता आदि जैसे कई अन्य अनूठी पहल की शुरुआत की है। ये कार्यक्रम क्षेत्र में जैव विविधता के संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए भी जिम्मेदार हैं।

वर्ष 2016 में टाटा स्टील ने अपने संचालन क्षेत्रों में जैव विविधता में ‘नो नेट लॉस’ प्राप्त करने के लिए एक कंपनी-व्यापी जैव विविधता नीति को अपनाया। इस संबंध में आईसीयूएन (इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर) द्वारा किए गए एक व्यापक मूल्यांकन के परिणामस्वरूप टाटा स्टील द्वारा जैव विविधता प्रबंधन योजनाएं विकसित की गईं। इसे आगे बढ़ाने के लिए, नाओमुंडी में ‘निच नेस्टिंग’ सहित कई पहल की गई। ‘निच नेस्टिंग’ की पहल ने आसपास के क्षेत्रों में पक्षियों की 18 प्रजातियों के संरक्षण के लिए 130 से अधिक घोंसले के बक्से प्रदान किए हैं।

पुनरावर्ती क्षेत्रों में खनन के बाद वनीकरण और कई पार्क जैसे कि सर दोराबजी टाटा बॉटनिकल पार्क, हिबिस्कस पार्क, नक्षत्र पार्क और नोआमुंडी में औषधीय पार्क का निर्माण भी खनन क्षेत्रों में हरित आवरण को संरक्षित करने के लिए टाटा स्टील की प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करता है। हिबिस्कस पार्क 3000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें मॉलॉर्का, वेलाचेरी, हवाई और मोशेयूटोस किस्मों सहित हिबिस्कस की 50 से अधिक प्रजातियां हैं।

वर्ष 1996 में स्थापित सर दोराबजी टाटा पार्क में बटरफ्लाई पार्क, एक कैक्टस हाउस, एक अमेजन रेन फॉरेस्ट और एक रेन वाटर हार्वेस्टिंग पार्क भी हैं। ये पार्क इस क्षेत्र की जलवायु परिस्थितियों में सुधार करते हुए कई जानवरों, पौधों और कीट प्रजातियों के प्राकृतिक आवास को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण रहे हैं।

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