JPSC की धांधली : गायब हो जाते हैं अनुसूचित जाति के पद

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सुनील कमल

हजारीबाग । झारखंड लोक सेवा आयोग राज्य के विश्वविद्यालयों में पदाधिकारियों की नियुक्ति में अनुसूचित जाति के अभ्‍यर्थियों का पद गायब कर देता है। यह शुरू से लेकर आज तक होता है। अन्यथा आरक्षण रोस्टर के रहते उनके पदों को स्थान हीं नहीं देता। वर्ष 2004 में रांची विश्वविद्यालय ने (विज्ञापन संख्या : 02/वि वि/2004) सहायक कुलसचिव का एक पद अनुसूचित जाति का प्रकाशित हुआ था। हालांकि वह पद रिजल्ट में गायब कर दिया गया। न्यायालय भी पद गायब होने के कारण पूछते रह गया, मगर जवाब आज तक नहीं मिला।

हाल में आयोग ने राज्य के चार विश्वविद्यालय में अधिकारियों की नियुक्ति‍ प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए विज्ञापन (संख्या : 03/2020) निकाला है। विभिन्‍न पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किये हैं। इनमें सहायक कुलसचिव के सात पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किये गये हैं, लेकिन इन पदों में अनुसूचित जाति के अभ्‍यर्थियों के लिए एक भी पद नहीं दिया गया है।

झारखंड सरकार के कार्मिक विभाग के आरक्षण रोस्टर के तहत अनुसूचित जाति को छठे स्थान पर आरक्षण के पद निर्धारित किये गये हैं। यहां सात पद रहने के बावजूद अनुसूचित जाति को एक भी पद नहीं दिया गया है। लगातार उपेक्षा से अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों ने न्याय की मांग कुलाधिपति सह राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और अन्य संबद्ध विभागों से की है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपनी कार्रवाई भी शुरू कर दी है।

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