JPSC की धांधली : आरक्षण दिए बिना सहायक प्राध्यापक का रिजल्ट निकालने की तैयारी

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सुनील कमल

हजारीबाग । झारखंड लोक सेवा आयोग ने राज्‍य के विश्‍वविद्यालयों में सहायक प्राध्‍यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की थी। बैकलॉग के तहत भी कुछ विषयों के इंटरव्‍यू लिये गये थे। हालांकि इस दौरान चलंत और मूक बधिर को आरक्षण दिए बिना सहायक प्राध्यापक का रिजल्ट जारी करने की तैयारी शुरू हो गई है।

जानकारी के मुताबिक अयोग ने नियमित नियुक्ति (विज्ञापन संख्या : 04/2018) और बैकलॉग नियुक्ति (विज्ञापन संख्‍या : 05/2018) के तहत राज्य के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की थी। बैकलॉग नियुक्ति के तहत कुछ विषयों के इंटरव्यू संपन्न कर लिए गये थें। इन नियुक्तियों में आयोग ने सिर्फ अंध दिव्यांगजन को हीं आरक्षण दिया है। चलंत दिव्यांग, मूक बधिर दिव्यांग और अन्य दिव्यांगजनों को आरक्षण दिया ही नहीं गया है।

दिव्यांग अभ्यर्थियों की शिकायत पर राज्य निःशक्तता आयुक्त सतीश चंद्र ने आयोग को कार्मिक विभाग के संकल्प (पत्रांक : 2249, दिनांक : 03.04.2018) और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत दिव्यांगजनों को चार प्रतिशत आरक्षण समान रूप से देने के निर्देश दिए। झारखंड उच्च न्यायालय ने रिट (संख्या : 3999/2019) के तहत चलंत और मूक बधिर दिव्यांगजनों को आरक्षण नहीं देने पर यथाशीघ्र जवाब दाखिल करने को आयोग, सरकार, विश्वविद्यालय, निःशक्तता आयुक्त, यूजीसी अन्य को कहा है। इस बीच बगैर आरक्षण दिए झारखंड लोक सेवा आयोग 31 जुलाई तक रिजल्ट निकालने की तैयारी कर रहा है।

पिछले दिनों कुलाधिपति सह राज्यपाल एचआरडी के सचिव  के ऑनलाइन मीटिंग में आयोग के अध्यक्ष ने 31 जुलाई तक बैकलॉग इंटरव्यू का रिजल्ट प्रकाशन की बात कही है। अभ्‍यर्थियों ने सवाल उठाया कि बगैर चलंत, मूक बधिर अन्य दिव्यांगजनों के आरक्षण दिए और कोर्ट को जवाब दिए बगैर रिजल्ट का प्रकाशन कैसे कर दिया जायेगा। अपने हक एवं अधिकार की खातिर दिव्यांग अभ्यर्थी काफी संघर्षरत हैं।

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