JPSC की धांधली : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने शुरू की कार्रवाई

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सुनील कमल

हजारीबाग । झारखंड लोक सेवा आयोग ने राज्‍य के चार विश्‍वविद्यालयों में पदाधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की है। इसमें आरक्षण के नियम का पालन नहीं किया जा रहा है। इसे लेकर अभ्‍यर्थियों ने राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग से शिकायत की थी। इसके आलोक में आयोग ने कार्रवाई शुरू कर दी है।

आयोग ने (विज्ञापन संख्या : 03/2020) के तहत राज्य के चार विश्वविद्यालय क्रमशः डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (रांची), बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (धनबाद), कोल्हान विश्वविद्यालय (चाईबासा), नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय, (मेदिनीनगर) में पदाधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की है। हालांकि आयोग ने इसमें दिव्यांगजनों एवं अनुसूचित जाति को आरक्षण नहीं दिया है।

आयोग ने अब तक विश्वविद्यालयों में जितनी बार पदाधिकारियों की नियुक्तियां की हैं, किसी भी नियुक्ति में दिव्यांग और अनुसूचित जाति को आरक्षण नहीं दिया है। सिर्फ एक बार ही अनुसूचित जाति को (विज्ञापन संख्या : 02/विवि/2004) रांची विश्वविद्यालय में सहायक कुलसचिव के पद पर आरक्षण दिया था। रिजल्ट में भी इस पद को गायब कर सामान्य वर्ग को दे दिया गया। अनुसूचित जाति के अभ्यर्थि‍यों की आवाज अनसुनी कर दी गई।

राज्य के विश्वविद्यालयों में कार्यरत दिव्यांग और अनुसूचित जाति के कर्मी लगातार अपने आरक्षण को छिनते जाने से काफी चिंवित और परेशान हैं। इस बार इन कर्मियों ने अपने अधिकार को लेकर राज्य के कुलाधिपति सह राज्यपाल, मुख्यमंत्री, एचआरडी के प्रधान सचिव, राज्य निःशक्तता आयुक्त, जेपीएससी के अध्‍यक्ष, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्‍यक्ष, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से गुहार लगायी है।

मानवाधिकार आयोग ने उनकी गुहार पर संज्ञान लेते हुए 27 जुलाई से अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है। राज्य निःशक्तता आयुक्त सतीश चंद्र पहले ही आयोग को कार्रवाई के के लिए पत्र लिख चुके हैं, परंतु आयोग ने अब तक कोई सुधार नहीं किया हैं। आयोग ने 4 जुलाई, 2020 को शुद्धि पत्र भी जारी किया, परंतु इसमे दिव्यांगज और अनुसूचित जाति के आरक्षण के सुधार का कोई जिक्र नहीं है।

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