JPSC की धांधली : न्यायालय ने मांगा जवाब, आयोग ने दिया रिजल्ट

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सुनील कमल

हजारीबाग । झारखंड लोक सेवा आयोग ने असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति शुरू की थी। इस प्रक्रिया तहत पहले बैकलॉग पद पर नियुक्ति होनी है। इस नियुक्ति में आयोग ने दिव्‍यांगजनों के आरक्षण नियम का पालन नहीं किया। इसके बाद भी यह सिलसिला जारी रहा। न्‍यायालय में मामला दर्ज होने पर आयोग से जवाब मांगा गया। जवाब देने की जगह आयोग ने रिजल्‍ट जारी कर दिया।

आयोग ने बैकलॉक पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन (संख्या : 05/2018) निकाला। इसमें दिव्‍यांगजनों के आरक्षण नियमों का उल्‍लंघन किया। सिर्फ अंध दिव्यांग को ही आरक्षण दिया गया। चलंत, मूक बधिर और अन्य को आरक्षण नहीं दिया गया है। यही हाल असिस्‍टेंट प्रोफेसर पद के लिए नियमित नियुक्ति (विज्ञापन संख्या : 04/2018) में किया गया है। इस नियुक्ति में दिव्यांगजनों के आरक्षण के पद अस्पष्‍ट हैं।

दिव्यांगजनों को आरक्षण दिलाने के लिए राज्य निःशक्तता आयुक्त सतीश चंद्र ने आयोग को पत्र लिखा। इसमें कार्मिक विभाग के संकल्‍प द्वारा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 के तहत चार प्रतिशत आरक्षण देने के निर्देश दिया। आयोग ने उनकी नहीं सुनी है। झारखंड उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने PIL (संख्या: 7525/2013) की सुनवाई के दौरान आयोग और सरकार को प्रत्येक नियुक्ति में दिव्यांगजनों के बैकलॉग सीट को शामिल करने का निर्देश दिया था। मतलब कि‍ अंध दिव्यांग समेत चलंत, मूक, बधिर और एक्ट में शामिल सभी दिव्यांगों को आरक्षण देना होगा। इसके बाद भी आयोग ने निर्देश का पालन हीं किया।

कोर्ट ने (रिट संख्या:3999/2019) की सुनवाई में आयोग, विश्वविद्यालय, सरकार, यूजीसी, राज्य निःशक्तता आयुक्त एवं अन्य को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा कि‍ चलंत दिव्यांग, मूक, बधिर, दिव्यांग एवं अन्य दिव्यांगजनों को आरक्षण क्यों नही दिया? जवाब के लिए तीन सप्ताह का समय दिया गया था, किंतु चार सप्ताह के बाद भी आयोग का जवाब नहीं मिला। जवाब देने के बदले आयोग ने पांच विषय के रिजल्ट बुधवार को जारी कर दिया। रिजल्ट में दिव्यांग के रिजल्ट का कोई निर्देश भी नहीं है।

अब दिव्यांगजन अभ्यर्थी न्याय के लिए कोर्ट से तुरंत सुनवाई का आग्रह किया है। उनका कहना है कि बैकलॉग के अन्य विषय का इंटरव्यू आयोग फिर से शुरू करने वाला है। इसके बाद नियमित यानी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इसमें भी दिव्यांगजनों के आरक्षण को नहीं दिखाया गया है।

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