JPSC की धांधली : क्‍वालिफाईंग का मतलब समझा नहीं पाया आयोग

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सुनील कमल

हजारीबाग । झारखंड लोक सेवा आयोग ने विज्ञापन (संख्या : 23/2016) के तहत छठी सिविल सेवा का आयोजन कर 326 पदों पर नियुक्ति की अनुशंसा सरकार के कार्मिक विभाग को कर दी। ये पूरा रिजल्ट विवाद में आ गया है। शुरू से ही इस परीक्षा ने विवाद के कई संघर्ष के पड़ाव पार किए। प्रारंभिक परीक्षा के तीन रिजल्ट प्रकाशन के बाद जैसे-तैसे मुख्य परीक्षा का आयोजन किया गया, क्योंकि भारी संख्या में छात्र समूह ने मुख्य परीक्षा का विरोध दर्ज किया था।

वर्ष 2016 से आरंभ नियुक्ति प्रक्रिया वर्ष 2020 में जाकर समाप्त कर लिया गया। झारखंड उच्च न्यायालय में कई फेल करार दिये गये छात्रों ने रिट दायर कि‍या है। ज्यादातर केस में क्‍वालिफाईंग मार्क्स से जुड़ा हुआ मामला है। जिसे आयोग भी कोर्ट को नहीं समझा पा रहा है। इसे अस्पष्टता होने की बात कह रहा है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि हिंदी 50 अंक का और अंग्रेजी 50 अंकों का था। इसमें 30 नंबर लाकर उतीर्ण होने की बात कही गयी थी। यह भी कहा गया था कि अंग्रेजी शामिल करने पर हिंदी अभ्यर्थियों पर इसका प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। फिर फाइनल रिजल्ट में कैसे असर पड़ गया? कैसे यह पेपर मेरिट लिस्ट वाला पेपर में तब्दील हो गया? अब आयोग शपथ पत्र दायर कर अस्पष्टता की बात कह रहा है।

अभ्‍यर्थियों का कहना है कि जब मामला हीं अस्पष्‍ट है, तब रिजल्ट वैध कैसे हो गया? रिजल्ट के विरोध में पूरे झारखंड के छात्र, छात्रा एवं अभिभावक अपने आंदोलन को जन आंदोलन की दिशा में ले जा रहे हैं। इसके खिलाफ लगातार धरना-प्रदर्शन हो रहे हैं। रविवार को ही सीएम का दाह संस्‍कार किया गया। अभ्‍यर्थियों ने सिर मुंडन कर विरोध किया।

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