JPSC : सीमित उपसमाहर्ता परीक्षा में हुई दिव्‍यांग अभ्‍यर्थियों की अनदेखी, मामला कोर्ट में

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सुनील कमल

हजारीबाग । झारखंड लोक सेवा आयोग ने सीमित उप समाहर्ता परीक्षा में दिव्‍यांग अभ्‍यर्थियों की अनदेखी की। निर्देश के बाद भी उनकी नियुक्ति नहीं की गई। यह मामला कोर्ट चला गया है। कोर्ट के आदेश से यह नियुक्ति प्रभावित होगी।

आयोग ने विज्ञापन (संख्या: 09/2010) से उपसमाहर्ता के 128 पदों पर नियुक्ति की है। इसमें दिव्यांगता अधिनियम की अनदेखी की गई है। इसकी वजह से यह रद्द हो सकती है। आयोग ने वर्ष 2013 में सरकारी कर्मियों को द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ सीमित परीक्षा के माध्यम से उपसमाहर्ता बनाया था। इसमें स्कूल के शिक्षक को कर्मी मानने पर विवाद हुआ था। हालांकि बाद में शिक्षकों को अभ्यर्थी मान लिया गया। इस परीक्षा में उन्होंने ज्यादा संख्या में सफलता अर्जित की। अब इन 128 उपसमाहर्ता का सरकार ग्रेडेशन करने जा रही है।

इसके खिलाफ दिव्यांगजनों ने कोर्ट में केस कर रखा है। कोर्ट में लंबित केस की सुनवाई होने जा रही है। दिव्यांगजनों के केस (नंबर : 3120/2013, 5043/2013, 5895/2013, 3326/2013) वर्ष 2013 से लंबित है। सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा अब तक संतोषजनक जवाब नहीं दिए गए हैं। इस परीक्षा में दिव्यांगजन के चार पद थे, परंतु दिव्यांगों के उतीर्ण होने के बावजूद इनकी नियुक्ति नहीं की गई।

उस वक्‍त नि:शक्‍तता आयुक्‍त सतीश चंद्र और कार्मिक विभाग ने दिव्यांगजन को उनका हक देने को कहा था। हालांकि आयोग ने इनकी नहीं सुनी। दिव्यांगता अधिनियम : 1995, झारखंड सरकार के दिव्यांगता अधिनियम : 7281/07 नवंबर, 2007 एवं सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में दिव्यांगजनों को हर हाल में नौकरियों में आरक्षण देने की बात कही गयी है। इन सबका आयोग ने जरा भी ख्याल नहीं रखा।

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