अब मानवाधिकार आयोग करेगा केशरी दास की हत्या की जांच

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  • पीड़ि‍ता सुशीला देवी की शिकायत पर आयोग ने पुलि‍स अधीक्षक से मांगा जवाब

दैनिक झारखंड न्‍यूज

गुमला । जिले के रायडीह थाना क्षेत्र के पोगरा निवासी केशरी दास की हत्या की जांच अब मानवाधिकार आयोग करेगा। मृतक की पत्नी सुशीला देवी की शिकायत पर राज्य मानवाधिकार आयोग ने मामला दर्ज करते हुए पुलि‍स अधीक्षक हृदीप पी जनार्दन से रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने मामले की सुनवाई के लिए 22 सितंबर, 20 की तिथि‍ मुकर्रर की है।

जानकारी के अनुसार रायडीह के पोगरा निवासी 39 वर्षीय केशरी दास की हत्या 10 मई, 2019 को कर दी गई थी। उसका शव गांव के एक कुएं में मिला। बगैर पुलि‍स को सूचना दिये शव का दाह संस्कार भी कर दिया गया। इस मामले में रायडीह थाना द्वारा (कांड संख्या : 33/2019) हत्या कर शव को छिपाना एवं संदर्भ विवरण अज्ञात उग्रवादी व्यक्ति की हत्‍या दर्ज कर अनुसंधान किया जाने लगा। इसी बीच मृतक की पत्नी सुशीला देवी ने कागजी प्रमाणों के साथ उपायुक्त से अज्ञात उग्रवादि‍यों द्वारा उनके पति की हत्या कि‍ये जाने के बाबत प्रावधान के तहत सरकारी नौकरी और मुआवजे की मांग की। उसके आवेदन पर उपायुक्‍त ने पुलिस अधीक्षक से रिपोर्ट मांगी। पुलि‍स अधीक्षक ने 16 जनवरी, 2020 को भेजी रिपोर्ट (ज्ञापांक-107) में प्रतिवेदित किया कि केशरी दास की मृत्यु अत्यधिक नशा में रहने के कारण कुएं में गिरने से हुई है। इस रिपोर्ट के आधार पर उपायुक्त की अध्यक्षता वाली जिला अनुकंपा समिति ने सुशीला देवी के आवेदन को अस्वीकृत कर दिया।

इसके बाद सुशीला ने 26 मई, 2020 को झारखंड राज्य मानवाधिकार आयोग के कार्यकारी अध्यक्ष के पास शिकायत की। उनसे न्याय दिलाने के लिए सीआईडी और अन्य उच्चस्तरीय जांच की मांग की। सुशीला ने लिखा है कि मेरे पति स्व. केशरी दास की हत्या अज्ञात उग्रवादि‍यों द्वारा की गयी है। घटना के संबंध में गांव-घर और परिवारजनों को भयादोहन और डरा-धमकाकर गलत प्रतिवेदन तैयार किया गया है। अत्यधिक नशा में रहने के कारण कुआं में गिरने से मृत्‍यु होने का झुठा और गलत प्रतिवेदन तैयार कर मुझे सरकारी लाभ से वंचित कर दिया गया है। यह असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है l उन्होंने कहा है कि मेरे पति की हत्या के बाद मुझे किसी तरह की कोई सरकारी सुविधा नहीं मिली। मैं अपने तीन छोटे-छोटे बच्चो और बूढ़ी सास की परवरिश करने में लाचार हूं। भुखमरी से गुजर रही हूं। इसके बाद आयोग ने केस (संख्या-138/2020) दर्ज करते आगे की कार्रवाई की।

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