नक्सल प्रभावित गांव की 16 सौ महिलाएं पारंपरिक खेती में बदलाव लाकर बन रहीं आत्मनिर्भर

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  • 50 एकड़ बंजर भूमि पर कर रही है लेमनग्रास की खेती

दैनिक झारखंड न्‍यूज

गुमला । मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड के गुमला जिला अंतर्गत बिशुनपुर में लेमनग्रास की खेती का जिक्र किया था। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे स्थानीय उत्पादों से कैसे बड़ी सफलता मिलती है, यह इसका बेहतरीन उदाहरण है। ज‍िले के नक्सल प्रभावित करीब डेढ़ दर्जन गांव की 1600 महिलाएं अपने पारंपरिक खेती में बदलाव लाकर आत्मनिर्भर हो रही हैं।

जिले के बिशुनपुर में लेमनग्रास की खेती को अपना कर महिलाओं ने देश के सामने आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की नजीर पेश की है। नक्सल प्रभावित इस इलाके के पुरूष ही नहीं महिलाएं भी कामकाज और अपनी सुरक्षा को लेकर पलायन करने को मजबूर थे। हालांकि स्वयंसेवी संगठन विकास भारती की कोशिशों ने उनके जीने का मकसद बदल दिया।

विकास भारती के सचिव अशोक भगत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मन की बात कार्यक्रम में लेमनग्रास की खेती की चर्चा किये जाने पर हर्ष व्यक्त किया। उन्‍होंने कहा कि उन सबों के लिए यह गर्व की बात है।

गौरतलब है कि बिशुनपुर के नक्सल प्रभावित करीब डेढ़ दर्जन गांव की 1600 महिलाएं अपने पारंपरिक खेती में बदलाव लाकर आत्मनिर्भर हो रही हैं। करीब पचास एकड़ बंजर भूमि पर लेमनग्रास लगाकर वैश्विक महामारी कोरोना वायरस को लेकर हुए लॉकडाउन में भी अच्छी आमदनी कर रही है। इससे ना केवल आर्थिक रूप से सशक्त बन रहीं हैं, बल्कि वे आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करने में भी महती भूमिका निभा रही है।

नक्सल प्रभावित इस इलाके में विकास भारती द्वारा 32 महिला समूह बनाए गए हैं। उन्हें समुचित रूप से प्रशिक्षित किया गया है। महिलाओं को लेमन ग्रास के पौधे उपलब्ध कराए गए हैं। इस लेमनग्रास से तेल निकालने वाले दो प्लांट भी स्थापित कराए गए हैं, जिसे महिलाएं स्वयं संचालित कर रही हैं।

महिला समूह से जुड़कर बिशनपुर की इन महिलाओं की दशा और दिशा आज बदल चुकी है । लेमनग्रास की खेती से ना केवल इन्हें रोजगार मिला है, बल्कि यह पूरे इलाके में बड़े परिवर्तन का वाहक भी बना है। इसने बता दिया है कि‍  महिला शक्ति और समूह शक्ति के दम पर कोई भी नया मुकाम हासिल किया जा सकता है।

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