पति के दीर्घायु होने के लिए महिलाएं कर रही तीज, जानें पहली बार किसने रखा था व्रत

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योगेश कुमार पांडेय

गिरि‍डीह । पति की दीर्घायु और मंगल के उद्देश्य से सुहागिन महिलाएं शुक्रवार को तीज व्रत मना रही है। यह भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष के तृतीया तिथि हस्त नक्षत्र में मनाया जाता है। इस दिन कुमारी और सौभाग्यवती स्त्रियां गौरीशंकर की विधिपूर्वक पूजा अर्चना करती हैं। यह त्योहार करवा चौथ से भी कठिन माना जाता है, क्योंकि करवा चौथ में चांद देखने के बाद पानी पीकर व्रत को तोड़ दिया जाता है, वही इस व्रत में पूरे दिन निर्जल व्रत किया जाता है। अगले दिन पूजन के बाद ही व्रत तोड़ा जाता है।

ये है मान्‍यता

इससे जुड़ी एक मान्यता है कि इस व्रत को करने वाली स्त्रियां माता पार्वती के समान ही सुखपूर्वक पतिरमन करके शिवलोक को जाती है। सौभाग्यशाली स्त्रियां अपने सुहाग को अखंड बनाये रखने और अविवाहित युवतियां मन मुताबिक वर पाने के लिए हरितालिका व्रत करती हैं।

गौरीशंकर की पूजा

सर्वप्रथम इस व्रत को माता पार्वती ने भगवान शिव शंकर के लिए रखा था। इस दिन विशेष रूप से गौरीशंकर का ही पूजन किया जाता है। इस दिन व्रत करने वाली स्त्रियां सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान, श्रृंगार करती हैं। केले के पत्‍तो से मंडप बनाकर गौरीशंकर की प्रतिमा स्थापित की जाती है। विभिन्न प्रकार के फल, फूल सहित मां पार्वती को सुहाग का समस्त सामग्री चढ़ाया जाता है। रात भर जागरण कर भजन, कीर्तन, तीन बार आरती की जाती है। ब्राह्मण द्वारा हरितालिका व्रत कथा का किया जाता है।

सोना निषेद्ध है

इस व्रत की पात्र कुमारी कन्याएं या सुहागिन महिलाएं दोनों ही है। परंतु एक बार व्रत रखने से जीवनपर्यंत व्रत रखना पड़ता है। यदि व्रती महिला गंभीर रोगी हालत में हो तो उसके बदले दूसरी महिला या उसका पति द्वारा भी इस व्रत को रखने का विधान है। व्रत में व्रती का शयन निषेद्ध है। इसलिए रातभर भजन कीर्तन करना चाहिए। प्रातःकाल स्नानादि के पश्चात श्रद्धा और भक्ति पूर्वक किसी सुपात्र सुहागिन महिला को यथाशक्ति सामर्थ्यानुसार श्रृंगार सामग्री, वस्त्र, खाद्य सामग्री, फल, मिष्ठान्न, आभूषण का दान करना चाहिए। पुरूषों को भी नियम का पालन और नारियों का उचित सम्मान करना चाहिये। तभी सुख, शांति, समृद्धि, सद्भावना का राज घर परिवार में कायम होता है।

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