पूर्व कैबिनेट मंत्री का है ये गांव, यहां पेशेंट तक एम्‍बुलेंस को पहुंचाने के लिए लेनी पड़ी है टैक्‍टर की मदद

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योगेश कुमार पांडेय

गिरिडीह । स्‍वतंत्रता सेनानी सह एकीकृत बिहार के पूर्व कैबिनेट मंत्री का यह पोबी गांव है। यहां डिलीवरी पेशेंट तक एम्‍बुलेंस को पहुंचाने के लिए टैक्‍टर की मदद लेनी पड़ती है। यह गांव जमुआ प्रखंड मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर दूरी परर स्थित है।

प्रखंड स्थित ग्राम पंचायत पोबी के तिनकोनिया मोड़ से धुरैता सिमाना तक 5 किलोमीटर की सड़क बिल्कुल जर्जर है। इसपर पैदल चलना भी दूभर है। आये दिन दो पहिया वाहन कीचड़ में फंसते रहते हैं। लोग गिरकर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। पोबी में गुहिया आहार के पास तो सड़क तालाब में तब्दील हो गयी है। पोबी के मुखिया नकुल कुमार पासवान द्वारा दस ट्रैक्टर मोरम गिराकर गढ्ढे को भरने का प्रयास किया गया, जो ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुआ।

डिलीवरी पेशेंट को अस्पताल लेकर जाने के लिए 16 अगस्‍त को 108 एम्‍बुलेंस गांव आ रहा था। यह गुहिया आहार के पास दलदल में बुरी तरह से फंस गया। चालक द्वारा ग्रामीणों के सहयोग से उसे निकालने की भरसक कोशिश की गयी, परंतु नाकामयाब रहें। एम्‍बुलेंस कीचड़ में करीब 3 घंटे फंसा रहा। मरीज के परिजन ट्रैक्टर लेकर आये तब टोचन कर उसे निकाला गया। इसके बाद बरवाडीह होकर एम्बुलेंस पेशेंट को लेकर जमुआ अस्पताल गया।

यह गांव एकीकृत बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे भूतपूर्व स्वतंत्रता सेनानी स्व. सदानंद प्रसाद की जन्म और कर्म भूमि रही है। हालांकि यह हर दृष्टिकोण से उपेक्षित है। विशेषकर  सड़कों के मामले में यह काफी पिछड़ा है। इस मार्ग से दर्जन से अधिक गांव के लोग गुजरते हैं। ग्रामीण सुधीर राम, पिंकू राम, नीरज चंद्रवंशी, मो शब्बीर अंसारी, सुरेश राम ने कहा कि सांसद, विधायक का पोबी के प्रति संवेदनाहीन हैं।

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