विधायक के पैतृक आवास से दो किलोमीटर की दूरी पर है यह सड़क, ग्रामीण नहीं करते इस्‍तेमाल, जानें वजह

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योगेश कुमार पांडेय

गिरिडीह । विधायक के पैतृक आवास से महज दो किलोमीटर की दूरी पर यह सड़क है। ग्रामीण इसका इस्‍तेमाल नहीं करते हैं। गांव जाने के लिए पगडंडियों का सहारा लेते हैं। यह मामला जिले के जमुआ प्रखंड अंतर्गत बेरहाबाद पंचायत के अटको गांव की है। यहां के ग्रामीण अपने गांव जाने के लिए पगडंडियों का सहारा लेकर जाने को मजबूर है।

जानकारी के मुताबिक उक्त ग्राम का एकमात्र पहुंच पथ है, जो काफी जर्जर है। बारिश में उक्त पथ से आवागमन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोग बताते हैं कि बेरहाबाद से अटको की दूरी डेढ़ से दो किलो मीटर है। पूरी सड़क कच्ची है। वर्षा में उक्त रोड में बड़े-बड़े गड्ढे बन गए है। पानी जमा रहता है। चार पहिया तो दूर, दो पहिया भी नहीं चल पाता है। पूरा रास्ता कीचड़ से भर जाता है।

अटको ग्राम के ग्रामीण कलीम अंसारी, कमरुद्दीन अंसारी, असरफ अंसारी, जलील अंसारी, जाहिर अंसारी, इदरीश अंसारी, युनुस अंसारी, यूसुफ अंसारी, हदीश अंसारी, इसराइल अंसारी, समसुल अंसारी, राजबली मियां सहित दर्जनों लोगों ने कहा कि बरसात में गांव टापू बन जाता है। सड़क जर्जर रहने के कारण दो पहिया एवं चार पहिया से गांव नही जा पाता है। इस समय किसी के बीमार पड़ जाने पर इलाज के लिए ले जाने में बहुत परेशानी होती है।

लोगों ने बताया कि जब चुनाव होता है, तब वालों का प्रमुख मुद्दा उक्त सड़क का निर्माण ही होता है। सभी उम्‍मीदवार सड़क बनाने का वादा कर चले जाते हैं। फिर भूल जातें हैं। ग्रमीणों ने बताया कि सड़क मरमत और निर्माण की बात मुखिया से करने पर वे विधायक कहते हैं कि विधायक से संपर्क करें वे अविलंब कालीकरण करा देने। विधायक से बात करने पर वे कहते हैं कि धैर्य रखें शीघ्र हो जाएगा। लोगों का कहना है कि जमुआ विधायक केदार हाजरा के पैतृक आवास कारोडीह से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर यह सड़क है। इसके बावजूद उन्‍हें यह नहीं दिख रहा है।

ग्रामीणों ने जिले के वरीय पदाधिकारी और सभी जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि शीघ्र सड़क बनवा दें। अन्यथा बाध्य होकर हमलोग उक्त सड़क निर्माण के लिए आंदोलन करना पड़ेगा।

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