DSE के आदेश को BEEO ने रखा ठेंगे पर, डेढ़ माह बाद भी नहीं हुई जांच, एसएमसी का पुनर्गठन लटका, विद्यार्थी लाभ से वंचित

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योगेश कुमार पांडेय

गिरिडीह । जिला शिक्षा अधीक्षक के आदेश को प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी ने ठेंगे पर रख दिया है। उनके आदेश के करीब डेढ़ माह बीत जाने के बाद भी जांच नहीं की। इससे विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) का पुनर्गठन लटका हुआ है। इसके कारण स्‍कूल के विद्यार्थियों को कोविड की राशि वितरण सहित विकास का कार्य बाधित हो रहा है। इससे अभिभावकों में रोष है। यह मामला जिले के जमुआ प्रखंड के मध्य विद्यालय पोबी से जुड़ा है।

जानकारी के मुताबिक एक पारा शिक्षिका ने विद्यालय प्रबंधन समिति के सचिव पर भयादोहन का आरोप लगाते हुए 8 मार्च, 2020 को प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी को लिखित आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई थी। जिला शिक्षा अधीक्षक अरविंद कुमार ने 12 मार्च, 2020 को विद्यालय का औचक निरीक्षण कि‍या। विद्यालय की शैक्षणिक व्‍यवस्था से नाराज होकर तत्काल प्रभाव से विद्यालय प्रबंधन समिति को भंग कर दिया।

पारा शिक्षिका सरिता कुमारी और प्रधानाचार्य सत्येन्द्र कुमार चौधरी को एक माह के लिए मध्याह्न भोजन संचालन का प्रभार देते हुए एक सप्ताह के अंदर ग्रामीणों को सूचना देकर आमसभा के माध्यम से समिति का पुनर्गठन कराने का निर्देश सचिव को दिया। हालांकि अब तक समिति का पुनर्गठन नहीं हुआ। इससे कोविड-19 राशि वितरण सहित अन्य विकास कार्य बाधित है। डीएसई के निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन किया गया है।

इस बाबत निवर्तमान एसएमसी अध्यक्ष गंगाधर पाण्डेय ने कहा कि डीएसई को लिखित आवेदन  देकर यथोचित जांच पड़ताल कर उचित कारवाई का अनुरोध किया था। इसपर अब तक कोई संज्ञान नहीं लिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। समिति अध्यक्ष, संयोजिका, सदस्यों की अनुपस्थिति में बिना बयान लिए ग्राम सभा द्वारा पुनर्गठित समिति को भंग करना बिल्कुल तानाशाही है।

पंचायत के मुखिया नकुल कुमार पासवान, पंचायत समिति सदस्य सीतीया देवी, स्थानीय प्राधिकार सदस्य विजय किशोर पाण्डेय, अनिल कुमार गोस्वामी, सदस्य सुखदेव स्वर्णकार, संयोजिका संगीता देवी, उपाध्यक्ष बेबी देवी, सहदेव यादव, अनिता देवी, ललिता देवी, प्रकाश साव, अशोक पासवान, उर्मिला देवी, बुद्धिजीवी, शिक्षाविद सहित सैकड़ों ग्रामीणों का हस्ताक्षर युक्त आवेदन डीएसई को 23 जून को आवेदन देकर लॉकडाउन अवधि तक भंग समिति को पुनर्बहाल कर कार्यादेश देने का अनुरोध किया गया था, ताकि कोविड-19 की राशि, चावल वितरण सहित अन्य कार्य बाधित नहीं हो।

25 जून को डीएसई द्वारा बीइइओ जमुआ-2 को स्थल पर जाकर जांच पड़ताल कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था। हालांकि बीईईओ की निष्क्रियता, मनमानी से जांच अधर में लटका हुआ है। इसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।

इस बाबत प्रधानाचार्य सत्येंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि डीएसई के दिशा निर्देशों का पालन करते हुए कोविड-19 के चावल, बैग का वितरण कर दिया गया  है। कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण समिति का पुनर्गठन संभव नहीं हो पाया है। बीईईओ सुखेन हांसदा ने कहा कि डीएसई का निर्देश मिला है। जल्द ही, यथोचित जांच पड़ताल की जायेगी।

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