चारों युगों में कृष्ण सुदामा की मित्रता सर्वश्रेष्ठ, कालजयी : योगेश

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दैनिक झारखंड न्‍यूज

गिरि‍डीह । जिले के जमुआ प्रखंड की ग्राम पंचायत पोबी पंच मंदिर परिसर में 2 अगस्‍त को मित्रता दिवस पर कालजयी मित्रता की मिसाल भगवान श्री कृष्ण और सुदामा के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। पंचमंदिर में शिव चर्चा में गुरूवाइन सरिता देवी द्वारा दृष्टांत  डाला गया।

युवा समाजसेवी योगेश कुमार पाण्डेय ने भगवान श्री कृष्ण और सुदामा की मित्रता का वर्णन करते हुए कहा कि ऐसा मित्र चारों युग मे होना असंभव है। मित्र श्री कृष्ण की तरह होना चाहिए, जो भले युद्ध नहीं लड़े, परंतु समुचित मार्गदर्शन करते रहें। मित्र कर्ण की तरह भी होना चाहिये, जो गलत अंजाम को जानते हुए भी मित्रता निभाने के लिए बलिदान हुआ। मित्र अमीर है या गरीब, यह मायने नहीं रखता। बूरे समय में कितना साथ निभाता है, यह बहुत मायने रखता हैं। वक्त और हालात सदा बदलते रहते हैं, लेकिन अच्छे रिश्ते और सच्चे दोस्त कभी नहीं बदलते।

श्री पांडेय ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि जब दोस्त प्रगति करें, तो गर्व से कहना कि वो मेरा दोस्त है। जब वह मुश्किल में हो तो गर्व से कहना कि मैं उसका मित्र हूं। एक अच्छी पुस्तक हजार दोस्तों के बराबर होती हैं, जबकि एक अच्छा दोस्त पूरी पुस्तकालय के बराबर होता हैं। इतिहास के हर पन्ने पर लिखा है, दोस्ती कभी बड़ी नहीं होती, निभाने वाले हमेशा बड़े होते हैं। त्याग, समर्पण, अपनापन का दिखावा है तो समझिए वह मित्र नहीं अवसरवादी हैं, जिनसे बचना चाहिए।

मनीष कुमार सिन्हा डमरू, बिनोद कुमार राम, टुन्नू साव, मनव्वर अंसारी कैला, पिंकू राम, राजा कुमार राम, गोपाल कृष्ण पाण्डेय, श्यामदेव राम, विनोद साव, राजेन्द्र राम आदि ने कहा कि वर्तमान में मित्र कम अवसरवादी अधिक मिलते हैं। मित्रता का स्वरूप बदल गया है। मां, बहन, पिता, भाई भी एक अच्छे मित्र होते हैं, जो मार्गदर्शन करते रहते हैं। उक्त अवसर पर अन्य ग्रामीण मौजूद थे।

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